कंदीय फसलों की वैज्ञानिक खेती से किसानों की बढ़ेगी आमदनी, उन्नत तकनीकों का मिला प्रशिक्षण

कुम्हरावण्ड कृषि अनुसंधान केन्द्र में एक दिवसीय प्रक्षेत्र भ्रमण एवं कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, 30 से अधिक किसानों ने लिया हिस्सा
कृषकों को उन्नत सब्जी बीज, कीटनाशक, मुनगा-अमरूद के पौधे और फसल सुरक्षा सामग्री का किया गया वितरण
जगदलपुर, 01 नवम्बर 2026
किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, कुम्हरावण्ड जगदलपुर में अखिल भारतीय समन्वित कन्द फसल अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय प्रक्षेत्र भ्रमण सह-कृषक प्रशिक्षण एवं कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शनिवार, 31 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में तोकापाल विकासखंड के ग्राम पोटानार से पहुंचे 30 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कंदीय फसलों की वैज्ञानिक खेती की बारीकियों को समझा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र के सह-संचालक अनुसंधान डॉ. एके ठाकुर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कंदीय फसलें आर्थिक लाभ के साथ-साथ पोषण की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ कंदीय फसलों की उन्नत तकनीकों को अपनाने की सलाह दी, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर कृषि आय में वृद्धि की जा सके।
इसके पश्चात कंद फसल अनुसंधान परियोजना की प्रभारी डॉ. पद्माक्षी ठाकुर ने किसानों को अनुसंधान केन्द्र के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न कंदीय फसलों की उन्नत किस्मों, आधुनिक उत्पादन तकनीकों, वैज्ञानिक खेती के तरीकों तथा फसलों के उचित प्रबंधन की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने किसानों को नई कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में डॉ. गुंजा ठाकुर ने कंदीय फसलों के उचित भंडारण, संरक्षण एवं लघु वर्गीय कंद फसलों के उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसलों के उत्पादन के साथ-साथ उनका सही भंडारण और प्रबंधन भी किसानों को बेहतर लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रशिक्षण एवं प्रक्षेत्र भ्रमण के उपरांत किसानों को खेती-किसानी में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न कृषि सामग्रियों का वितरण किया गया। इसमें उन्नत सब्जी बीज, कीटनाशक, मुनगा एवं अमरूद के पौधे तथा फसल सुरक्षा और उपज को सुखाने के लिए तिरपाल शामिल थे।
कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में पहल
इस आयोजन के माध्यम से किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि अनुसंधान केन्द्र में प्रत्यक्ष रूप से उन्नत फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों को देखने-समझने का अवसर भी मिला। वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और कृषि सामग्री के वितरण से किसानों को अपनी खेती में नए प्रयोग करने तथा कंदीय फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की प्रेरणा मिली।
कुल मिलाकर, कुम्हरावण्ड कृषि अनुसंधान केन्द्र की यह पहल किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।




