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बस्तर दशहरा किसी राजनीतिक दल या नेता का नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की आस्था और परंपरा का पर्व है : सांसद महेश कश्यप

सभी समाजों, मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, देवी-देवताओं, सिरहा-पुजारियों, प्रशासन और मीडिया के सहयोग से विधिवत संपन्न हुआ 2026 का बस्तर दशहरा – सांसद ने सभी के प्रति जताया आभार, हादसे में प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का दिया भरोसा

जगदलपुर, 28 अक्टूबर 2026

विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा 2026 के सफल एवं विधिवत आयोजन के बाद बस्तर लोकसभा सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने जगदलपुर के पुराने तहसील कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा लगभग छह सौ वर्षों से हमारे पूर्वजों द्वारा निभाई जा रही परंपरा है। इस गौरवशाली विरासत को वर्ष 2026 में भी सभी के सहयोग और सहभागिता से विधिवत संपन्न कराया गया है।

सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा किसी एक व्यक्ति, राजनीतिक दल या नेता का आयोजन नहीं है, बल्कि यह पूरे बस्तर की आस्था, संस्कृति और परंपरा का पर्व है। इसे सभी समाजों को मिलकर मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया, जिला प्रशासन, विभिन्न समाजों के प्रमुखों, मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, देवी-देवताओं, सिरहा, पुजारियों और गायता सहित सभी लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। इसके लिए वे सभी के प्रति हृदय से आभार, धन्यवाद और अभिनंदन व्यक्त करते हैं।

पाट जात्रा से लेकर मावली परघाव तक सभी विधान हुए संपन्न

बस्तर दशहरा के पारंपरिक विधानों का उल्लेख करते हुए सांसद ने बताया कि 12 अगस्त को पाट जात्रा के साथ इस वर्ष के दशहरा पर्व का पहला विधान प्रारंभ हुआ था। इसके बाद डेरी गड़ाई की रस्म, कलश स्थापना, काछन देवी की अनुमति, रैला माता की अनुमति, निशा जात्रा, मावली परघाव, भीतर रैनी, बाहर रैनी, मुरिया दरबार और कुटुंब जात्रा सहित सभी पारंपरिक रस्मों का विधिवत निर्वहन किया गया।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह मां दंतेश्वरी की सेवा, आराधना और सदियों पुरानी परंपराओं के निर्वहन का महापर्व है। नवरात्रि के दूसरे दिन जोगी बिठाई की रस्म भी इसी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राजनीति से ऊपर उठकर मनाया जाना चाहिए बस्तर दशहरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद महेश कश्यप ने दशहरा को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों के लोगों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं। मेरा मानना है कि बस्तर दशहरा किसी राजनीतिक पार्टी या नेता का नहीं है। यह पूरे बस्तर के लोगों का पर्व है। हमने सभी को निमंत्रण दिया था और सभी को इसमें शामिल होकर मिल-जुलकर इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि यदि आयोजन के दौरान कहीं कोई त्रुटि या कमी दिखाई देती है तो उसे सामने लाकर सुझाव देना चाहिए, ताकि भविष्य में उसमें सुधार किया जा सके। लेकिन हर परिस्थिति में अवसर तलाशने जैसी राजनीति करना बेहद दुखद है। बस्तर दशहरा राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक आस्था और सहभागिता का विषय होना चाहिए।

किलेपाल परगना के हादसे से प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का दिया भरोसा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद ने किलेपाल परगना के लोगों के साथ हुए हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही वे पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे थे। एफआईआर दर्ज कराने के दौरान भी वे मौजूद रहे और अपनी ओर से हरसंभव सहयोग किया। प्रशासनिक स्तर पर मदद के साथ व्यक्तिगत रूप से भी सहयोग किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजा दिलाने के लिए उपमुख्यमंत्री से भी चर्चा की गई है। वहीं हादसे में एक अन्य साथी का पैर कट जाने के मामले में उनके लिए संविदा आधार पर नौकरी की व्यवस्था कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद ने कहा कि आगामी दो-तीन दिनों में इस संबंध में आदेश जारी कराने की उम्मीद है। पीड़ितों के लिए आगे भी जो संभव होगा, वे सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे।

दशहरा में योगदान देने वाले सभी परिवारों का किया जाएगा सम्मान

सांसद महेश कश्यप ने बस्तर दशहरा की परंपराओं को पीढ़ियों से आगे बढ़ाने वाले परिवारों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दशहरा के प्रत्येक विधान में अनेक परिवारों की भूमिका रहती है। फूल लाने से लेकर रथ संचालन के दौरान तेल डालने तक अलग-अलग परिवार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

उन्होंने कहा कि दशहरा से जुड़े ऐसे सभी परिवारों से उनका संपर्क हुआ है। आने वाले दिनों में एक बैठक आयोजित कर इन परिवारों के योगदान को सम्मानित करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि इस ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखने वाले प्रत्येक परिवार के योगदान को उचित सम्मान मिले।

बस्तर दशहरा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि छह सौ वर्षों से अधिक समय से चली आ रही आस्था, सामाजिक एकता और जनजातीय संस्कृति की जीवंत पहचान है। इस परंपरा को आज भी विभिन्न समाजों के लोग अपनी जिम्मेदारियों और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। सांसद महेश कश्यप ने सभी के सहयोग के लिए आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में भी बस्तर दशहरा इसी आपसी भाईचारे, समन्वय और श्रद्धा के साथ आयोजित होता रहेगा। मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ी इस अनूठी परंपरा को राजनीति से ऊपर रखकर संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना ही हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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