बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान का खतरा, छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट

बस्तर संभाग में 204 मिमी से अधिक बारिश की आशंका, किसानों को खड़ी फसल की कटाई फिलहाल टालने की सलाह; कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले को किया सतर्क
जगदलपुर, 25 अक्टूबर 2026
दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान सक्रिय हो रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार तूफान की गति 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है। मौसम की गंभीरता को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने प्रदेशभर के किसानों के लिए विशेष मौसम चेतावनी जारी करते हुए कृषि संबंधी आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार 25 अक्टूबर को बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में कुछ स्थानों पर 204 मिलीमीटर से अधिक अत्यधिक भारी वर्षा होने की आशंका जताई गई है। वहीं बालोद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कांकेर, बीजापुर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश तथा रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग और राजनांदगांव में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।
बस्तर संभाग में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने प्रशासनिक अधिकारियों और मैदानी अमले को पूरी तरह सतर्क रहने तथा मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में आम नागरिकों और किसानों को तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है।
मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमान के मुताबिक 26 अक्टूबर को दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा, कबीरधाम, बस्तर और बीजापुर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
वहीं 27 अक्टूबर को बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों के अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा होने का अनुमान है। इसके अलावा बलौदाबाजार-भाटापारा, सारंगढ़-बिलाईगढ़, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बीजापुर के कई इलाकों में भी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार 28 और 29 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान का प्रभाव प्रदेश में अधिक व्यापक रहने की संभावना है। इस दौरान सभी जिलों में बारिश तथा कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान है।
किसानों के लिए कृषि विश्वविद्यालय की विशेष सलाह
चक्रवाती तूफान और तेज बारिश की आशंका को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवा निदेशालय ने किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष कृषि समसामयिक सलाह जारी की है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि धान, दलहन और तिलहन की जो फसलें पकने की स्थिति में हैं, उनकी आगामी दो से चार दिनों तक कटाई नहीं की जाए। जिन किसानों ने फसल की कटाई कर ली है, वे उपज को तत्काल सुरक्षित एवं सूखे स्थानों पर रखें।
खेतों में जलभराव की स्थिति से बचने के लिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने की अपील की गई है। इसके साथ ही उतेरा फसल के रूप में तिवरा एवं अलसी तथा रबी फसलों की बुवाई फिलहाल टालने और नवंबर के प्रथम सप्ताह से मौसम की स्थिति अनुकूल होने पर बुवाई शुरू करने की सलाह दी गई है।
तेज हवाओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए करेला और लौकी जैसी लताओं वाली सब्जियों में सहारा देने की व्यवस्था करने तथा केले के पौधों को बांस के सहारे बांधने की सलाह दी गई है। संभावित ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यकतानुसार जाली का उपयोग करने को भी कहा गया है।
वहीं पशुपालकों को अपने मवेशियों को सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। आकाशीय बिजली और वज्रपात के खतरे को देखते हुए बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे शरण नहीं लेने तथा खुले स्थानों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहा चक्रवाती तूफान छत्तीसगढ़ के लिए मौसम संबंधी बड़ी चुनौती बन सकता है। खासकर बस्तर संभाग में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में किसानों से अपील है कि मौसम विभाग और कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अपनी खड़ी फसल और कृषि उपज की सुरक्षा को प्राथमिकता दें तथा अनावश्यक जोखिम न उठाएं। प्रशासनिक सतर्कता के साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी इस संभावित प्राकृतिक चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहा चक्रवाती तूफान छत्तीसगढ़ के लिए मौसम संबंधी बड़ी चुनौती बन सकता है। खासकर बस्तर संभाग में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में किसानों से अपील है कि मौसम विभाग और कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अपनी खड़ी फसल और कृषि उपज की सुरक्षा को प्राथमिकता दें तथा अनावश्यक जोखिम न उठाएं। प्रशासनिक सतर्कता के साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी इस संभावित प्राकृतिक चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।




