छत्तीसगढ़बस्तर संभाग

नक्सलमुक्त बस्तर में विकास का नया अध्याय, 200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा

रायपुर, 15 अक्टूबर 2026

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नक्सली हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

अमित शाह गुरुवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर के दूसरे चरण के शुभारंभ कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ

दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में तीन जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर क्षेत्र के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे।

नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब पीड़ितों की पीड़ा दूर करना जरूरी : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पाँच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवाए और कई लोगों का जीवन हमेशा के लिए प्रभावित हुआ। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया।

शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था। अब नक्सलवाद से मुक्ति के बाद प्रभावित लोगों के पुनर्वास, आजीविका और सम्मानपूर्ण जीवन की व्यवस्था करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और स्मार्ट वॉकिंग स्टिक जैसे उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाया जा सकता है। इस कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति और भारतीय जैन संघ सहित विभिन्न संस्थाओं का योगदान महत्वपूर्ण है।

आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास के लिए उठाए गए कदम

अमित शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी दी गई और 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। क्षेत्र में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई।

संपर्क और आवागमन सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।

शाह ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।

200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’

बस्तर के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, अब उन्हीं केंद्रों से सरकारी योजनाओं, जनसेवा और विकास कार्यों को गति दी जाएगी। इन सेवा केंद्रों के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

शाह ने विश्वास जताया कि इन केंद्रों से बस्तर में विकास की प्रक्रिया तेज होगी और क्षेत्र को समृद्ध बनाने का संकल्प साकार होगा।

नक्सलमुक्त बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय क्षेत्र बनाएंगे : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता लंबे समय से भय और हिंसा से मुक्ति चाहती थी। लोग शांति, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते थे। जनता के विश्वास और सहयोग ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अब सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र को तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना और इसे देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, संचार और रोजगार सुविधाओं का विस्तार कर रही हैं।

‘नियद नेल्लानार’ योजना से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहीं सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से उन दूरस्थ गांवों तक विकास की सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो लंबे समय से बुनियादी सेवाओं से वंचित थे।

उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। घरों तक नल से जल पहुंचाने और दूरसंचार सेवाओं का विस्तार करने के प्रयास जारी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इन इलाकों में 431 स्कूल खोले गए हैं, जबकि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई गांवों के लोगों को राशन प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब गांवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था कर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बस्तर के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, ताकि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद क्षेत्र में शांति के साथ विकास और समृद्धि भी सुनिश्चित हो सके।

सेवा डेरों से खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बस्तर के अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण तथा स्वरोजगार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इससे युवाओं और ग्रामीण परिवारों को अपने क्षेत्र में ही कमाई के नए अवसर मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों का सेवा केंद्रों में बदलना बस्तर में हो रहे परिवर्तन का प्रतीक है। अब इन स्थानों से जनसेवा, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

खेती, पशुपालन और सिंचाई से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी प्राथमिकता दी जा रही है। पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

साय ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण बस्तर के अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर गंवाए हैं। आईईडी विस्फोटों ने कई परिवारों को जीवनभर की पीड़ा दी है। ऐसे लोगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर में तीन जिलों के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उपकरण वितरित करना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने इस कार्य में सहयोग देने वाली भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और अन्य संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की सहायता जारी रहेगी : विजय शर्मा

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष ग्रामीणों का जीवन प्रभावित किया है। कोई बच्चा गांव में खेलते समय, कोई किसान खेत में जाते हुए और कोई ग्रामीण दैनिक कामकाज के दौरान विस्फोट का शिकार हुआ। कई लोगों ने अपने अंग गंवाए और कुछ की आंखों की रोशनी चली गई।

उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बस्तर की जनता ने नक्सलवाद से मुक्ति का संकल्प नहीं छोड़ा। अब राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सहायता के लिए निरंतर काम करेगी।

विजय शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।

कृत्रिम अंग मिलने से लाभार्थियों के जीवन में लौटी उम्मीद

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने दिव्यांगजनों से संवाद कर उनके अनुभव जाने।

सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था और बाद में उसे काटना पड़ा। कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए तैयार हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चल पा रहे हैं।

वहीं, दंतेवाड़ा जिले के जावंगा और मेटापाल के दिव्यांगजन अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इससे दैनिक आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी।

लाभार्थियों ने इस पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तथा सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

विकसित बस्तर के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर को अब विकास और खुशहाली की नई दिशा में आगे बढ़ाना है। प्रभावित लोगों के पुनर्वास, दिव्यांगजनों की सहायता और दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, हर युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए। दशकों तक हिंसा और भय का सामना करने वाला बस्तर अब शांति, समृद्धि और विकास की नई पहचान बनेगा।

कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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