छत्तीसगढ़बस्तर संभाग

बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी: बस्तर-बकावंड के कई गांवों में धान की फसल डूबी, किसानों ने सर्वे और क्षतिपूर्ति मांगी

बस्तर, 29 सितम्बर 2026। जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बारिश और नदी-नालों के बढ़े जलस्तर ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बस्तर विकासखंड के सोनारपाल, चपका, मधोता, खैरगुड़ा, भैंसगांव, बोदरा, टिकनपाल और उसरी सहित कई गांवों में खेतों में खड़ी धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण खराब होने लगी है। पानी उतरने के बाद कई खेतों में धान के पौधे जड़ से सड़कर सूखते नजर आ रहे हैं।

वहीं बकावंड ब्लॉक के नेगानार, गेंघरामुंडा और रायकेरा नाला क्षेत्र में भी बाढ़ के कारण किसानों के खेतों में नुकसान होने की बात सामने आई है। इसके अलावा तारापुर, बनियागांव, उलनार, मालगांव, कोहकापाल सहित नदी से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी है।

किसानों के मुताबिक धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों में बड़ी राशि खर्च की गई है। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज भी लिया है। ऐसे में खड़ी फसल के खराब होने से किसानों के सामने लागत डूबने और कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों के घरों में भी पानी घुसने से उन्हें दोहरी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फसल बीमा कराया, लेकिन दावा प्रक्रिया को लेकर असमंजस

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के कई किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया है। हालांकि किसानों का कहना है कि फसल नुकसान की सूचना देने और बीमा दावा करने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी उन्हें नहीं है। वहीं जिन किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया है, वे प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने की स्थिति में शासन की ओर से मिलने वाली राहत और क्षतिपूर्ति के प्रावधानों की जानकारी चाहते हैं।

किसानों ने मांग की है कि राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों की टीम प्रभावित गांवों में पहुंचकर खेतों और फसलों का मौके पर निरीक्षण करे। सोनारपाल, चपका, मधोता, खैरगुड़ा सहित बकावंड क्षेत्र के नेगानार, गेंघरामुंडा, रायकेरा नाला, तारापुर, बनियागांव, उलनार, मालगांव और कोहकापाल सहित नदी-नालों से प्रभावित सभी क्षेत्रों में नुकसान का सर्वे कराया जाए।

किसानों का कहना है कि सिर्फ कुछ स्थानों तक सीमित सर्वे के बजाय सभी प्रभावित किसानों के खेतों में हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाना चाहिए, ताकि पात्र किसानों को नियमानुसार उचित राहत और क्षतिपूर्ति मिल सके।

जल्द सर्वे की मांग

किसानों के अनुसार खेतों में पानी भले ही कम हो रहा है, लेकिन लंबे समय तक जलभराव के कारण धान की फसल लगातार खराब हो रही है। ऐसे में नुकसान का सही आकलन करने के लिए जल्द से जल्द सर्वे जरूरी है। किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का निरीक्षण, बीमा दावे की प्रक्रिया की जानकारी और पात्र किसानों को शासन के प्रावधानों के तहत राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से घर और खेत दोनों प्रभावित हुए हैं। इसलिए राजस्व विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक निरीक्षण कर वास्तविक नुकसान दर्ज किया जाए और नियमानुसार किसानों को राहत दिलाने की कार्रवाई की जाए।

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