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सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका, ट्रम्प की मंजूरी से ₹2.3 लाख करोड़ की डील

वॉशिंगटन डीसी/रियाद,18 सितम्बर 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 24 अरब डॉलर यानी लगभग ₹2.3 लाख करोड़ बताई जा रही है। हालांकि, बिक्री को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।

F-35 डील पर सुरक्षा चिंताएं

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, डील को लेकर सुरक्षा और संवेदनशील सैन्य तकनीक से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की एक रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि चीन सऊदी अरब में जासूसी या सैन्य सहयोग के जरिए F-35 की संवेदनशील तकनीक हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

F-35 को अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल किया जाता है। इसमें अत्याधुनिक रडार, सेंसर और निगरानी प्रणालियां लगी हैं। अमेरिकी एजेंसियों को आशंका है कि इनसे जुड़ी संवेदनशील जानकारी चीन तक पहुंचने पर अमेरिकी सैन्य तकनीक को नुकसान हो सकता है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि F-35 से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में केवल अमेरिकी और अधिकृत सऊदी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रवेश दिया जाए।

चीन से सऊदी की बढ़ती नजदीकी बनी वजह

अमेरिकी चिंता की एक बड़ी वजह सऊदी अरब और चीन के बीच बढ़ते सैन्य एवं तकनीकी संबंध हैं। सऊदी अरब चीन से बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदता है। इसके अलावा चीन सऊदी को मिसाइल निर्माण और तकनीकी क्षमताओं में भी सहयोग दे रहा है।

सऊदी अरब के टेलीकॉम और अन्य बुनियादी ढांचे में Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियों के उपकरणों का इस्तेमाल भी होता है। अमेरिकी एजेंसियां लंबे समय से चीनी तकनीकी उपकरणों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर सवाल उठाती रही हैं।

UAE की F-35 डील भी चीन के कारण अटकी थी

अरब देशों को F-35 देने को लेकर अमेरिका पहले भी ऐसी सुरक्षा चिंताओं का सामना कर चुका है। 2020 में ट्रम्प प्रशासन ने UAE को F-35 बेचने पर सहमति दी थी, लेकिन UAE के चीन के साथ बढ़ते सैन्य और तकनीकी संबंधों को लेकर अमेरिकी चिंताओं के बीच बिक्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

अब सऊदी अरब के मामले में भी चीन से जुड़े सुरक्षा सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

इजराइल की सैन्य बढ़त भी अहम मुद्दा

सऊदी अरब को F-35 देने के प्रस्ताव पर इजराइल की सैन्य बढ़त को लेकर भी विचार किया जाएगा। फिलहाल इजराइल मध्य-पूर्व का एकमात्र देश है जिसके पास F-35 विमान हैं।

अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति में इजराइल की सैन्य बढ़त बनाए रखना लंबे समय से महत्वपूर्ण पहलू रहा है। ऐसे में सऊदी अरब को अत्याधुनिक F-35 विमान देने से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाएगा।

F-35 मिलने में लगेंगे कई साल

अमेरिकी विदेश विभाग ने जून में 48 F-35 विमानों और एक अतिरिक्त इंजन की बिक्री का प्रस्ताव कांग्रेस की दो समितियों को भेजा था। अब इस बिक्री प्रक्रिया में कांग्रेस की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी।

F-35 का निर्माण अमेरिकी कंपनी Lockheed Martin करती है। विमान के निर्माण और डिलीवरी की प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। इसलिए ट्रम्प प्रशासन की मंजूरी के बावजूद सऊदी अरब को F-35 विमान तुरंत नहीं मिलेंगे।

सऊदी अरब लंबे समय से F-35 खरीदने की इच्छा रखता है। दोनों देशों के बीच कई दशकों से सैन्य सहयोग रहा है और सऊदी अरब अमेरिकी हथियारों का एक बड़ा खरीदार है।

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