15वें वित्त आयोग के ऑडिट पर RTI में सवाल: रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी मांगने पर जनपद ने थमाया कानूनी जवाब

दो अलग-अलग RTI आवेदनों में ऑडिट रिपोर्ट और अनियमितताओं पर हुई कार्रवाई की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं, लेकिन सूचना देने के बजाय अलग-अलग ग्राम पंचायतों में आवेदन करने की सलाह दी गई।
जगदलपुर,बकावंड, 01 अगस्त 2026 । सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जनपद पंचायत बकावंड से मांगी गई जानकारी को लेकर नया विवाद सामने आया है। पत्रकार डमरू कश्यप ने वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त आयोग के तहत कराए गए ऑडिट कार्यों से संबंधित दो अलग-अलग आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किए थे।
पहले आवेदन में जनपद पंचायत बकावंड के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में कराए गए 15वें वित्त आयोग के ऑडिट की रिपोर्ट की प्रमाणित छायाप्रति मांगी गई थी।
वहीं दूसरे आवेदन में ऑडिट के दौरान जिन ग्राम पंचायतों में अनियमितताएं पाई गईं, उन पर की गई कार्रवाई से संबंधित समस्त अभिलेखों एवं प्रमाणित प्रतियों की जानकारी चाही गई थी।
दोनों आवेदनों के जवाब में जनपद पंचायत बकावंड ने सूचना उपलब्ध कराने के बजाय यह कहते हुए जवाब दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत का अलग जनसूचना अधिकारी है, इसलिए संबंधित ग्राम पंचायतों में अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए जाएं।
आवेदक का कहना है कि जब 15वें वित्त आयोग के ऑडिट का समन्वय जनपद पंचायत स्तर से होता है, तो ऑडिट रिपोर्ट, पत्राचार अथवा कार्रवाई से संबंधित जानकारी जनपद कार्यालय में उपलब्ध होनी चाहिए। यदि सूचना संबंधित ग्राम पंचायतों के पास थी, तो सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवेदन संबंधित लोक प्राधिकरण को स्थानांतरित किया जा सकता था।
इस जवाब के बाद अब मामले में प्रथम अपील दायर करने की तैयारी की जा रही है। अपील में यह मांग की जाएगी कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा जनपद पंचायत द्वारा दिए गए उत्तर की वैधानिक समीक्षा की जाए।
अब सवाल यह है कि जब ऑडिट जनपद पंचायत के समन्वय में कराया गया, तो क्या उसकी रिपोर्ट और कार्रवाई से जुड़े अभिलेख जनपद कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं? या फिर सूचना उपलब्ध कराने के बजाय आवेदक को अलग-अलग ग्राम पंचायतों के चक्कर लगाने के लिए कहा जा रहा है? इन सवालों का जवाब अब प्रथम अपील और आगे की कानूनी प्रक्रिया में सामने आएगा।




