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भारत ने रचा इतिहास: निजी रॉकेट विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग, वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में नई उड़ान

नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा, 18 जुलाई 2026

भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण किया। आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से लॉन्च हुए इस रॉकेट ने लगभग 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में अपने पेलोड को सफलतापूर्वक स्थापित किया।

‘आगमन’ मिशन के तहत लॉन्च किए गए विक्रम-1 ने अपने तीनों सॉलिड-फ्यूल चरण और ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल का सफल संचालन किया। लगभग 24 मीटर लंबे इस रॉकेट को कार्बन कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर से तैयार किया गया है और यह 350 किलोग्राम तक का पेलोड निर्धारित कक्षा में पहुंचाने में सक्षम है।

इस मिशन में बेंगलुरु की कंपनी कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा लैब में तैयार किया गया ‘डायमंड लोटस’ भी पेलोड के रूप में भेजा गया। यह मिशन वर्ष 2022 में स्काईरूट के विक्रम-S सब-ऑर्बिटल मिशन के बाद कंपनी की अगली बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए कहा कि विक्रम-1 भारत की अंतरिक्ष यात्रा का नया अध्याय है और यह देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने भी इस मिशन को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह केवल एक रॉकेट की उड़ान नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के नए युग की शुरुआत है। उनके अनुसार यह सफलता भारतीय स्टार्टअप, उद्योग और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत भागीदारी को नई गति देगी।

लॉन्च से पहले तकनीकी कारणों से कुछ समय के लिए काउंटडाउन रोका गया था, लेकिन सभी परीक्षण सफल रहने के बाद रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरते हुए अपना मिशन पूरा किया। यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक लॉन्च मार्केट में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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