छत्तीसगढ़

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में चीतल शिकार मामले का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर, 24 जून 2026

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चीतल का शिकार करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चीतल का मांस, शिकार में प्रयुक्त हथियार और वन्यजीव अवशेष बरामद किए गए हैं।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में रिजर्व क्षेत्र में अवैध शिकार के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के निदेशक गुरुनाथन एन. के नेतृत्व में एंटी पोचिंग टीम को 21 जून को सूचना मिली कि कोर क्षेत्र के ग्राम अमाड़ में किसी वन्यप्राणी का अवैध शिकार किया गया है।

सूचना मिलते ही टीम ने सर्च वारंट प्राप्त कर संदिग्धों के घरों में छापेमारी की। तलाशी के दौरान आरोपी नरेश कुमार भुजिया और बालाराम सोरी के घरों से चीतल का पका हुआ मांस, खून से सने 4 तीर, 2 धनुष, 2 धनुष-गुलेल, खरगोश पकड़ने के 5 फंदे, 7 मोर पंख और 4 बाज के पंख बरामद किए गए।

पूछताछ में आरोपी नरेश कुमार भुजिया ने स्वीकार किया कि उसने 17 जून 2026 को तारीपानी घाट क्षेत्र में तीर-धनुष से चीतल का शिकार किया था। आरोपियों की निशानदेही पर घटना स्थल का सत्यापन किया गया और उनके खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9, 31, 39, 50, 51 एवं 52 के तहत वन अपराध दर्ज किया गया।

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जिला एवं अपर सत्र न्यायालय गरियाबंद में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। बरामद मांस के नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए सील कर स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ, जबलपुर भेजा गया है, ताकि मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य भी उपलब्ध हो सकें।

इस कार्रवाई पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वन्यजीवों के शिकार, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस पूरी कार्रवाई में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम, उत्तर उदंती वन परिक्षेत्र के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा डॉग स्क्वाड की स्निफर डॉग ‘टीना’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से वन विभाग को यह महत्वपूर्ण सफलता मिली।

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