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बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, देश-विदेश के पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

बैम्बू राफ्टिंग, “आमचो लाड़ी” होमस्टे और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम

बस्तर, 26 मई 2026। बस्तर अंचल का खूबसूरत गांव मांझीपाल अब छत्तीसगढ़ के तेजी से उभरते इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी खास पहचान बना चुका है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित यह प्राकृतिक स्थल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी, जनजातीय संस्कृति और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

राज्य में ग्रामीण, सांस्कृतिक और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की विशेष पहल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। मांझीपाल न केवल पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी पैदा कर रहा है।

कांगेर नदी में बैम्बू राफ्टिंग बना रोमांच का नया आकर्षण

मांझीपाल की सबसे बड़ी खासियत यहां बहने वाली निर्मल कांगेर नदी है। नदी की शांत जलधारा में स्थानीय आदिवासियों द्वारा तैयार पारंपरिक बांस की नावों पर होने वाली बैम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को रोमांच से भर देती है। राफ्टिंग के दौरान सैलानी घने जंगलों की हरियाली, दुर्लभ पक्षियों की आवाज और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत अनुभव लेते हैं।

यह गतिविधि केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर की जनजातीय जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुाव को भी दर्शाती है।

“आमचो लाड़ी” होमस्टे में मिल रहा बस्तर की संस्कृति का अनुभव

मांझीपाल स्थित “आमचो लाड़ी” होमस्टे आज पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हो चुका है। यहां आने वाले मेहमानों को पारंपरिक बस्तरिया व्यंजन, ग्रामीण जीवनशैली और आत्मीय मेजबानी का अनुभव मिलता है। विदेशी पर्यटक भी इस होमस्टे की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

यहां आने वाले सैलानी जंगल भ्रमण, बर्ड वॉचिंग, स्थानीय रीति-रिवाजों और जनजातीय संस्कृति को करीब से महसूस कर रहे हैं। शहरों की भागदौड़ से दूर यह स्थान पर्यटकों को शांति और प्रकृति से जुड़ाव का अनूठा अनुभव दे रहा है।

सामुदायिक पर्यटन से स्थानीय युवाओं को मिल रहा रोजगार

राज्य सरकार की कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म नीति का सकारात्मक असर अब बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। मांझीपाल के पर्यटन हब बनने से स्थानीय युवाओं को टूरिस्ट गाइड, राफ्टिंग संचालक, होमस्टे प्रबंधन और हस्तशिल्प बिक्री जैसे क्षेत्रों में स्थायी रोजगार मिल रहा है।

इससे एक ओर जहां ग्रामीणों का पलायन रुक रहा है, वहीं दूसरी ओर जनजातीय संस्कृति और स्थानीय विरासत के संरक्षण को भी नई दिशा मिल रही है।

कैसे पहुंचे मांझीपाल

मांझीपाल, जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जगदलपुर से दरभा मार्ग के जरिए पक्की सड़क द्वारा निजी वाहन या टैक्सी से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा भी जगदलपुर में ही स्थित है।

प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर पर्यटन मॉडल का बेहतरीन उदाहरण बन चुका मांझीपाल अब बदलते बस्तर की नई और गौरवशाली पहचान के रूप में उभर रहा है।

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