अब एक मिस्ड कॉल पर मिलेगी बाजार भाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी, वन मंत्री केदार कश्यप ने शुरू की नई सेवा



रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वनांचल में रहने वाले लाखों वनोपज संग्राहकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ी पहल की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने नया रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से “छत्तीसगढ़ वनोपज संरक्षण वाणी” और IVRS आधारित सूचना एवं संवाद तंत्र का शुभारंभ किया। इस नई व्यवस्था से राज्य के 13 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक परिवारों को अब एक फोन कॉल पर बाजार भाव, सरकारी योजनाओं और आजीविका से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकेंगी।
सरकार का मानना है कि यह पहल वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का नया माध्यम बनेगी। आधुनिक तकनीक के जरिए दूरस्थ इलाकों तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाकर वनोपज संग्राहकों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐसे काम करेगी मिस्ड कॉल सेवा
वनोपज संग्राहकों को किसी जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। उन्हें सिर्फ टोल फ्री नंबर 9811125813 पर मिस्ड कॉल देना होगा। इसके बाद 911 से शुरू होने वाले नंबर से कॉल बैक आएगा। कॉल रिसीव करते ही संग्राहक हल्बी, गोंडी सहित अपनी स्थानीय भाषाओं और बोलियों में जरूरी जानकारी सुन सकेंगे।
इस सेवा के माध्यम से संग्राहकों को जंगल और वनोपज संरक्षण, सतत संग्रहण, बाजार भाव, मूल्य संवर्धन और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। खास बात यह है कि उपयोगकर्ता अपनी राय, अनुभव और सुझाव भी रिकॉर्ड कर सकेंगे, जिससे यह व्यवस्था शासन और संग्राहकों के बीच संवाद का मजबूत माध्यम बनेगी।
बिचौलियों पर निर्भरता होगी कम
सरकार का कहना है कि बाजार भाव और मूल्य संवर्धन की सटीक जानकारी मिलने से वनोपज संग्राहकों की बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। इससे उन्हें अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा और आय में वृद्धि होगी। स्थानीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध होने से दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सूचना का प्रसार भी अधिक प्रभावी होगा।
मंत्री केदार कश्यप ने क्या कहा
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि वनोपज संग्राहकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक जानकारी पहुंचाने का यह प्रयास लाखों परिवारों के लिए आजीविका का मजबूत आधार बनेगा।
उन्होंने कहा कि “वनोपज संरक्षण वाणी” तकनीक और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो वन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
राज्य में वनाधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर द्वारा संचालित की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि IVRS आधारित यह संवाद तंत्र वनाधारित आजीविका को संगठित और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ की ईडी श्रीमती संजीता गुप्ता, डीजीएम श्री जाधव सागर रामचंद्र, महाप्रबंधक श्री सुबीर कुमार दत्ता सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।




