
📍 जगदलपुर | 22 अप्रैल 2026
बचपन में दी गई सीख जब प्रकृति से जुड़ती है, तो उसका असर जीवनभर रहता है। इसी सोच के साथ जगदलपुर जिले के 120 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का अनोखा पाठ पढ़ाया गया।
‘तितली संस्था’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को सूखी पत्तियों और फल-सब्जियों के छिलकों से खाद (कम्पोस्ट) बनाने की प्रक्रिया सिखाई। बच्चों ने खुद कचरा इकट्ठा कर उसे खाद में बदलने का प्रयोग किया, जिससे उन्हें कचरे के सही उपयोग की समझ मिली।
इस गतिविधि के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। खेल-खेल में उन्हें बताया गया कि घर का जैविक कचरा ‘काला सोना’ बन सकता है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और पर्यावरण को स्वच्छ रखता है।
इस पहल ने यह साबित किया कि अगर बच्चों को छोटी उम्र से ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए, तो वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
👉 संदेश साफ है:
छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं — और इसकी शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए।




