राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जगदलपुर आगमन, बस्तर पण्डुम का किया शुभारंभ



,,मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर हुआ आत्मीय स्वागत, जनजातीय परंपराओं व हस्तशिल्प आधारित भव्य प्रदर्शनी का किया अवलोकन,,


जगदलपुर, 7 फरवरी 2026/ देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का शुक्रवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में गरिमामय आगमन हुआ। वे ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित तीन दिवसीय संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ महोत्सव के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं। राष्ट्रपति के आगमन से बस्तर अंचल में उत्साह और गौरव का वातावरण देखने को मिला। जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू का पुष्पगुच्छ भेंट कर अत्यंत आत्मीय एवं गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू एवं वन मंत्री केदार कश्यप ने भी महामहिम का अभिनंदन किया। इसके साथ ही सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव एवं महापौर संजय पांडे ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए उनका अभिवादन किया। संभाग आयुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी.,कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने कतारबद्ध होकर राष्ट्रपति का सम्मानपूर्वक स्वागत किया। बस्तर पण्डुम के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और लोकजीवन पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर स्थानीय कारीगरों एवं कलाकारों से संवाद किया और बस्तर की समृद्ध आदिवासी विरासत की सराहना की। प्रदर्शनी में ढोकरा हस्तशिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला तथा जनजातीय चित्रकला को प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया गया। ढोकरा कला में प्रयुक्त लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक और पूर्णतः हस्तनिर्मित कलाकृतियों ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। वहीं मिट्टी से बनी टेराकोटा आकृतियों में लोक आस्था और ग्रामीण जीवन की सजीव झलक देखने को मिली।
लकड़ी की नक्काशी कला में सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी से निर्मित पारंपरिक मूर्तियां प्रदर्शित की गईं। बांस और सीसल कला से बने उपयोगी एवं सजावटी हस्तशिल्पों के साथ-साथ गढ़े हुए लोहे की कलाकृतियों ने भी दर्शकों को आकर्षित किया। जनजातीय आभूषणों के स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से निर्मित पारंपरिक आभूषण प्रदर्शित किए गए, जो आदिवासी समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
तुम्बा कला के अंतर्गत सूखी लौकी से बने पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहीं। वहीं दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेश-भूषा और आभूषण युवक-युवतियों द्वारा प्रस्तुत किए गए।
स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, तीखुर सहित पारंपरिक खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही लोकचित्रों एवं साहित्य के माध्यम से बस्तर की संस्कृति, इतिहास और लोकजीवन की झलक प्रस्तुत की गई।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा बस्तर की जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बस्तर पण्डुम के माध्यम से आदिवासी विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को नई गति मिलने की उम्मीद है।






