बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के पंजीयक जुटेंगे, सहकार से समृद्धि पर मंथन होगा

जगदलपुर,6 अक्टूबर 2026
बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की कार्ययोजना पर मंथन करेंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी करेंगे।
सम्मेलन में 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक शामिल होंगे। अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल तथा भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन भी इसमें भाग लेंगे।
सम्मेलन में मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (एम-पैक्स) और दुग्ध समितियों के गठन, एम-पैक्स के कंप्यूटरीकरण, डिजिटल तकनीक के उपयोग, भंडारण क्षमता बढ़ाने और सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने पर विशेष चर्चा होगी। इसके साथ ही एम-पैक्स के माध्यम से उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से समन्वय को लेकर आगामी तीन महीनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को मजबूती देना है। पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा की जाएगी और विभिन्न राज्य एम-पैक्स व दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं तथा ऋण उपलब्धता से जुड़े अनुभव साझा करेंगे।
सम्मेलन में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, कारोबार के विविधीकरण और प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक एवं बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।
दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग तथा राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। एम-पैक्स के माध्यम से उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता तथा जिला स्तर के सफल सहकारी मॉडल भी साझा किए जाएंगे। अधिकारी बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भ्रमण भी करेंगे।
छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स सहित कई समितियां गठित
‘सहकार से समृद्धि’ के तहत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की गई हैं।
‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए कृषकों के खाते खोले गए हैं। एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में परिवर्तित किया गया है। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में उपलब्ध माइक्रो एटीएम से अब तक 324 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन हो चुके हैं।
725 एम-पैक्स में बने गोदाम
राज्य में एम-पैक्स के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जा रहे हैं। आरआईडीएफ योजना 2022 के तहत 725 एम-पैक्स में गोदामों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2025 में जर्जर या गोदाम विहीन 100 एम-पैक्स में गोदाम निर्माण की योजना स्वीकृत कर निर्माण एजेंसियों का चयन किया गया है। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है।
विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स चयनित किए गए हैं। इनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है, नौ को एएमआई सब्सिडी मिली है और छह में निर्माण शुरू हो गया है।
राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से जुड़ रहे एम-पैक्स
उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 जिलों और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी नियुक्त किया गया है। एनसीसीएफ में राज्य के 2,058 एम-पैक्स और नाफेड में 412 एम-पैक्स पंजीकृत हैं।
वहीं 1,681 एम-पैक्स को राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 एम-पैक्स को राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 एम-पैक्स को भारतीय बीज सहकारी समिति की सदस्यता मिली है।
एथेनॉल संयंत्रों से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन और रोजगार
कोंडागांव में 80 केएलपीडी क्षमता का एथेनॉल संयंत्र स्थानीय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन कर रहा है और रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है। भोरमदेव में पीपीपी मॉडल पर संचालित 80 केएलपीडी एथेनॉल संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने को नियमित और बढ़ती आय प्रदान कर रहा है।
पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इनसे कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों के इन अनुभवों के आधार पर सहकारी समितियों की पहुंच, सेवाओं और कारोबार के विस्तार की आगामी दिशा पर विचार किया जाएगा।




