छोटे देवड़ा में शिलापट्ट पर सियासत गरम: खेमेश्वरी कश्यप के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार, फिर बोलीं- ‘नाम नहीं, समान सम्मान का सवाल’; विधायक लखेश्वर बघेल के 13 साल के कार्यकाल पर उठाए सवाल

बस्तर,17 सितम्बर 2026
बस्तर विधानसभा क्षेत्र के बकावंड ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा में विकास कार्यों के शिलापट्ट पर नाम दर्ज होने को लेकर सियासत गरमा गई है। दो विकास कार्यों के भूमिपूजन के दौरान लगाए गए शिलापट्ट को लेकर भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य खेमेश्वरी कश्यप ने कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रेस नोट जारी कर जवाब दिया गया, जिस पर अब खेमेश्वरी कश्यप ने दोबारा पलटवार किया है।
दरअसल, छोटे देवड़ा में विधायक मद से स्वीकृत 6.40 लाख रुपये की सीसी सड़क के भूमिपूजन के शिलापट्ट को लेकर खेमेश्वरी कश्यप ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि शिलापट्ट पर विधायक लखेश्वर बघेल, सरपंच संतोष कश्यप और उप सरपंच राहुल सोनवानी का नाम दर्ज है, लेकिन जिला पंचायत और जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को जगह नहीं दी गई।
खेमेश्वरी कश्यप ने इसकी तुलना मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के तहत 5.20 लाख रुपये के विकास कार्य के शिलापट्ट से की। उन्होंने कहा कि इस शिलापट्ट में मुख्य अतिथि सांसद महेश कश्यप के साथ क्षेत्रीय विधायक लखेश्वर बघेल का नाम भी दर्ज है। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जनपद अध्यक्ष सोनबारी भद्रे, जनपद उपाध्यक्ष तरुण पांडे और जनपद सदस्य खेमेश्वरी कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को भी स्थान दिया गया है।
खेमेश्वरी कश्यप ने इसे भाजपा सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सोच से जोड़ते हुए कांग्रेस पर भेदभाव की राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि गांव के विकास में सरपंच, पंच, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य सहित सभी जनप्रतिनिधियों की भूमिका होती है, ऐसे में शिलापट्ट पर केवल चुनिंदा नामों को जगह देना उचित नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने दिया जवाब
भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष के आरोपों के बाद कांग्रेस युवा नेता मोना पाढ़ी समेत कुछ कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रेस नोट जारी कर प्रतिक्रिया दी गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “विधायक जी का काम बोलता है, पटल पर नाम होने से काम नहीं होता।” कांग्रेस की ओर से शिलापट्ट में नाम को लेकर उठाए गए सवालों को विकास कार्य से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया गया।
इसके बाद अब खेमेश्वरी कश्यप ने कांग्रेस नेताओं के बयान पर फिर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि किस व्यक्ति का नाम पत्थर पर लिखा गया या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जानबूझकर सार्वजनिक कार्यक्रम की पहचान और सम्मान से अलग रखना उचित है।
‘विधायक का नाम हटाने की मांग नहीं’
खेमेश्वरी कश्यप ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग विधायक लखेश्वर बघेल का नाम हटाने की नहीं है। उनका कहना है कि विधायक का नाम सम्मानपूर्वक दर्ज होना चाहिए, लेकिन उसी तरह क्षेत्र के निर्वाचित जिला पंचायत और जनपद पंचायत प्रतिनिधियों के पद और उनकी पंचायती भूमिका का भी सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास कार्य किसी एक व्यक्ति की निजी उपलब्धि नहीं होते। इसमें शासन, प्रशासन, निर्वाचित संस्थाओं और जनता का सामूहिक योगदान होता है। इसलिए विकास कार्यों के शिलापट्ट में जनप्रतिनिधियों के सम्मान और निर्धारित प्रोटोकॉल की भावना का पालन किया जाना चाहिए।
‘काम बोलता है तो 13 साल के कार्यकाल पर भी हो चर्चा’
कांग्रेस नेताओं के ‘विधायक जी का काम बोलता है’ वाले बयान पर खेमेश्वरी कश्यप ने विधायक लखेश्वर बघेल के लगभग 13 वर्ष के कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर विकास कार्य ही विधायक की पहचान हैं, तो जनता के सामने यह भी चर्चा होनी चाहिए कि इतने लंबे कार्यकाल में क्षेत्र में कौन-कौन से प्रमुख विकास कार्य स्वीकृत और पूर्ण हुए और उनका वास्तविक लाभ जनता को कितना मिला।
उन्होंने कांग्रेस शासनकाल में लखेश्वर बघेल के आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व पर रहने का भी उल्लेख किया। खेमेश्वरी कश्यप ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण दायित्व और लंबे सार्वजनिक कार्यकाल के बाद बस्तर के आदिवासी अंचल के लिए हुए बड़े और स्थायी विकास कार्यों पर जनता के सामने चर्चा होना स्वाभाविक है।
‘मुद्दा व्यक्तिगत नहीं, जनप्रतिनिधियों के सम्मान का’
खेमेश्वरी कश्यप ने कहा कि यह विवाद व्यक्तिगत नहीं है और न ही किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ है। उनके मुताबिक मुद्दा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान, विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही का है।
उन्होंने कहा कि विधायक का नाम शिलापट्ट पर रहे, लेकिन जनता द्वारा चुने गए जिला पंचायत और जनपद पंचायत सदस्यों को भी सम्मान मिलना चाहिए। लोकतंत्र में सम्मान किसी एक दल की बपौती नहीं है, बल्कि प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की लोकतांत्रिक मर्यादा का विषय है।
छोटे देवड़ा से शुरू हुआ यह शिलापट्ट विवाद अब कांग्रेस विधायक के कार्यकाल, विकास कार्यों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर राजनीतिक बहस में बदल गया है। भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी के बाद अब क्षेत्र की सियासत में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।




