चार भाइयों से बढ़ा बड़े घर परिवार का कुनबा, नवाखानी पर फिर एक साथ जुटीं कई पीढ़ियां ,खैरगुड़ा में परंपरा और रिश्तों का संगम, बुजुर्गों के आशीर्वाद के साथ नई फसल का अन्न ग्रहण

बस्तर,19 सितंबर 2026
चार भाइयों से शुरू हुआ बड़े घर परिवार का सफर आज कई पीढ़ियों तक पहुंच चुका है। परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन पारिवारिक रिश्तों और परंपराओं की डोर आज भी मजबूत है। नवाखानी पर्व पर बड़े घर परिवार के सदस्य एक साथ जुटे तो खैरगुड़ा में परिवार की एकता और आपसी प्रेम की झलक देखने को मिली।
नवाखानी के अवसर पर बड़े घर परिवार ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नई फसल के अन्न का पूजन कर उसे ग्रहण किया। परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने के साथ नई पीढ़ी ने भी इस परंपरा में भागीदारी निभाई। घर के आंगन में कई पीढ़ियों के एक साथ बैठने से माहौल आत्मीय और उत्सवमय रहा।
बड़े घर परिवार के वरिष्ठ जदुराम, डमरू सिंह ठाकुर ने बताया कि नवाखानी उनके परिवार के लिए केवल नई फसल का पर्व नहीं, बल्कि परिवार को एक साथ जोड़ने वाला अवसर है। पुरखों से चली आ रही परंपराओं को निभाते हुए परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा करते हैं। उनका कहना है कि परिवार भले ही बड़ा हो गया है और सदस्य अलग-अलग जगहों पर रहने लगे हैं, लेकिन ऐसे पर्व रिश्तों को और मजबूत करते हैं।
बड़े घर परिवार की खासियत इसकी पीढ़ियों की एकता है। चार भाइयों से आगे बढ़ा यह परिवार आज कई पीढ़ियों में विस्तार पा चुका है। नवाखानी पर बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक सभी की मौजूदगी ने इस पारिवारिक विरासत को जीवंत कर दिया। बुजुर्गों ने जहां नई पीढ़ी को परंपराओं और संस्कारों की जानकारी दी, वहीं युवाओं ने इन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाई।
नवाखानी पर्व में बड़े घर परिवार की वरिष्ठ सुकटी बाई, जदु राम, शिवनाथ, चैतन सिंह, तुलाराम, तयसिंह, डमरू सिंह, अंतुराम, समलुराम, चंद्रों, रघु, विश्वनाथ, नरेंद्र, केशव, लखेश्वर, छबीलाल, मनोज, पेनसिंह, थबिर, डोमेश, खेमेश्वर, राजकुमार और तापेश सहित परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित रहे।
खैरगुड़ा में बड़े घर परिवार का यह नवाखानी मिलन नई पीढ़ी के लिए भी खास रहा। नई फसल के स्वागत के साथ परिवार ने अपनी पुरानी परंपरा, संस्कार और रिश्तों की गर्माहट को भी आगे बढ़ाया।




