
जगदलपुर, 16 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर बस्तर की महिलाएं मेहनत, लगन और आत्मनिर्भरता से नई मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत बस्तर जिले के ग्राम इरिकपाल की फुलमती दीदी आधुनिक खेती अपनाकर आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रही हैं। मां दंतेश्वरी उमा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी फुलमती दीदी ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (IFC) के तकनीकी मार्गदर्शन से सब्जी उत्पादन में अपनी अलग पहचान बनाई है।
फुलमती दीदी ने अपने खेत में मचान विधि, मल्चिंग और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर विभिन्न प्रकार की नकदी सब्जियों की खेती शुरू की। उनकी मेहनत और आधुनिक कृषि पद्धतियों का परिणाम है कि अब तक वे 10 क्विंटल से अधिक हरी सब्जियों का उत्पादन कर चुकी हैं। उनकी बाड़ी में करेला, तोरई, बरबट्टी, परवल सहित अन्य हरी सब्जियों की भरपूर पैदावार हो रही है। बेहतर गुणवत्ता और ताजगी के कारण स्थानीय हाट-बाजारों में उनकी सब्जियों की अच्छी मांग बनी हुई है।
सब्जियों की नियमित तुड़ाई के बाद उन्हें क्रेट्स में व्यवस्थित कर सीधे स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए पहुंचाया जा रहा है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है और फुलमती दीदी को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। नवरात्रि और त्योहारी सीजन में हरी सब्जियों की बढ़ती मांग से उनकी उपज की बिक्री भी अच्छी हो रही है, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है।
फुलमती दीदी के अनुसार, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आईएफसी क्लस्टर के तकनीकी मार्गदर्शन से उनकी खेती को नई दिशा मिली है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। सब्जी उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आमदनी से वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ बच्चों की बेहतर शिक्षा और पोषण पर भी ध्यान दे रही हैं।
फुलमती दीदी की सफलता ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन रही है। उनकी उपलब्धि बस्तर की अन्य महिलाओं को भी संगठित होकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, नकदी फसलों की खेती करने और अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है। नवरात्रि के पावन अवसर पर उनकी यह सफलता नारी शक्ति के परिश्रम, आत्मविश्वास और संकल्प का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।




