छत्तीसगढ़बस्तर संभाग

BASTAR NEWS UPDATE:बस्तर दशहरा में मां दंतेश्वरी को पहला न्योता, केके रेललाइन बहाली में जुटे 800 मजदूर, NH-30 पर तीन मौतें, सुकमा में पांच महीने से जंजीर में युवक, अबूझमाड़ में सड़क के लिए ग्रामीणों की जद्दोजहद

बस्तर,16 अक्टूबर 2026

1. बस्तर दशहरा में मां दंतेश्वरी को पहला न्योता, राजपरिवार ने निभाई सदियों पुरानी परंपरा

दंतेवाड़ा में शारदीय नवरात्र की पंचमी पर बस्तर दशहरा की धार्मिक परंपरा के तहत बस्तर राजपरिवार ने अपनी आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को दशहरा में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। राजपरिवार के उत्तराधिकारी कमलचंद भंजदेव, उनकी पत्नी भुवनेश्वरी देवी और राजमाता कृष्ण कुमारी देवी मंदिर पहुंचे। यहां विधि-विधान से मां दंतेश्वरी और मावली माता की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद विनय पत्रिका भेंट कर देवी को बस्तर दशहरा में शामिल होने का न्योता दिया गया। परंपरा के अनुसार, अष्टमी तिथि पर मां दंतेश्वरी की डोली जगदलपुर के लिए रवाना होगी। माईजी की डोली के पहुंचने के बाद बस्तर दशहरा की धार्मिक परंपराओं को पूर्ण स्वरूप मिलता है।

2. केके रेललाइन बहाली के लिए दिन-रात काम, 800 मजदूर और 80 मशीनें तैनात

बस्तर में केके रेललाइन पर भूस्खलन से बाधित रेल परिचालन बहाल करने के लिए रेलवे ने मरम्मत अभियान तेज कर दिया है। मल्लीगुड़ा रेलवे स्टेशन के पास 25 सितंबर को हुए भूस्खलन से करीब 60 मीटर रेलखंड के नीचे की मिट्टी बह गई थी। इससे लगभग 40 फीट गहरा गड्ढा बन गया और रेललाइन को गंभीर नुकसान पहुंचा। बहाली कार्य में करीब 800 मजदूर और 80 मशीनें लगाई गई हैं। जेसीबी, भारी ट्रक और ट्रैक्टर की मदद से दिन-रात काम किया जा रहा है। रेलमार्ग बाधित होने से यात्री ट्रेनों की आवाजाही और लौह अयस्क की ढुलाई प्रभावित है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, 18 अक्टूबर तक रेललाइन बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, परिचालन सुरक्षा जांच और कार्य की प्रगति पर निर्भर करेगा।

3. नेशनल हाईवे-30 पर एक रात में तीन युवकों की मौत, तीन घायल

बस्तर जिले में नेशनल हाईवे-30 पर बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवती समेत तीन लोग घायल हो गए। पहला हादसा दहीकोंगा के पास हुआ, जहां बाइक सवार आयतु राम मंडावी (25), निवासी काकड़ाबेड़ा, और अमित बेसरा (18), निवासी सुलेंगा, की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरी घटना बनियागांव स्थित नीलगिरि प्लांट के पास हुई। यहां डीएनके निवासी कृष्णा समरथ (24) दूधगांव के एक ढाबे से खाना लेकर बाइक से घर लौट रहा था, तभी वह अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया। हादसे में उसकी मौत हो गई। दोनों घटनाओं में अज्ञात वाहनों की भूमिका की आशंका है। पुलिस जांच के बाद दुर्घटनाओं के कारण स्पष्ट होंगे। लगातार हो रहे हादसों ने हाईवे पर सड़क सुरक्षा और रात में सुरक्षित आवागमन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

4. सुकमा में पांच महीने से जंजीर में बंधा युवक, मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

सुकमा जिले के देवरपल्ली गांव में आदिवासी युवक माड़वी गंगा को करीब पांच महीने से पैरों में जंजीर बांधकर रखने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 से उसकी मानसिक स्थिति में उतार-चढ़ाव आने लगा था। परिजनों और ग्रामीणों ने शुरुआत में झाड़-फूंक और पूजा-पाठ के जरिए उसे ठीक करने का प्रयास किया। बाद में उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे दूसरे परिवार के पास ले जाया गया, जहां प्रार्थना के माध्यम से उपचार किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि युवक को घर से भागने और विवाद करने से रोकने के लिए जंजीर से बांधा गया। कुछ लोगों ने इलाज के नाम पर मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह मामला मानसिक स्वास्थ्य उपचार, मानवीय गरिमा और सुरक्षित देखभाल से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन युवक की स्थिति का आकलन कर उसे विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराएं।

5. अबूझमाड़ में सड़क नहीं, ग्रामीण खुद उठा रहे विकास का बोझ

नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। ग्राम पंचायत गुदाड़ी के आश्रित गांव दुर्गीपारा में सड़क की बदहाली के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। ओरछा से दुर्गीपारा और हांदावाड़ा जलप्रपात की ओर जाने वाला करीब 25 किलोमीटर का रास्ता बड़े पत्थरों और खराब पगडंडियों से भरा है। परेशान ग्रामीण कुदाल, फावड़ा, गैंती और सब्बल लेकर खुद रास्ते से पत्थर हटाने में जुटे हैं। सड़क की समस्या से राशन और जरूरी सामान की आपूर्ति, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है। गांव में पेयजल, स्कूल और आंगनबाड़ी भवन जैसी सुविधाओं का भी अभाव है। जनप्रतिनिधियों राकेश उसेंडी और गुड्डू उसेंडी ने गांवों का निरीक्षण कर प्रशासन से सड़क निर्माण और अन्य समस्याओं के समाधान की मांग की। उन्होंने अधिकतम 10 दिनों में काम शुरू कराने की मांग उठाई। अब ग्रामीणों को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।

Related Articles

Back to top button
You Cannot able to copy the content! All Reserved Rights of Bastar Dagar