छत्तीसगढ़बकावंड

मैलबेड़ा में 84 लाख की पानी टंकी बनी शोपीस: 2 साल बाद भी एक घर तक नहीं पहुंची पानी की बूंद, आयरनयुक्त पानी पीने मजबूर ग्रामीण


बकावंड,11 सितम्बर 2026

बकावंड ब्लॉक के ग्राम पंचायत मैलबेड़ा में जल जीवन मिशन के तहत करीब 84 लाख रुपये की लागत से बनाई गई पानी टंकी पिछले दो साल से सिर्फ शोपीस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी बनने के बाद से आज तक एक भी घर में पानी की एक बूंद नहीं पहुंची। पाइपलाइन और कनेक्शन के नाम पर महज खानापूर्ति किए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है।

ग्रामीणों के मुताबिक जानी पारा में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां 80 के दशक में लगाया गया पुराना हैंडपंप ही ग्रामीणों के लिए पानी का मुख्य सहारा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हैंडपंप से आयरनयुक्त लाल पानी निकलता है, जिसे पीने के लिए लोग मजबूर हैं। हैंडपंप आए दिन खराब होने के कारण ग्रामीणों को चंदा जुटाकर 500 से 700 रुपये खर्च कर निजी प्लंबर बुलाना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग और ठेकेदार की लापरवाही के कारण जल जीवन मिशन का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि टंकी का निर्माण पूरा होने के बावजूद पाइपलाइन और घरेलू कनेक्शन आज तक शुरू नहीं किए गए हैं। टंकी खाली पड़ी है और उसकी स्थिति भी खराब होती जा रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर सरपंच, सचिव और PHE विभाग से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है।

जनपद सदस्य ने जताई नाराजगी

इस मामले को लेकर जनपद सदस्य वैशाखु भारती ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार और विभाग की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पानी टंकी को तत्काल शुरू कराया जाए, सभी घरों में पानी का कनेक्शन पहुंचाया जाए और मामले की जांच कर लापरवाह ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं होने पर वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

बताया जा रहा है कि बकावंड ब्लॉक की कई अन्य पंचायतों में भी जल जीवन मिशन की योजनाएं बंद या अधूरी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे जनहित के मुद्दे सामने आने के बावजूद कई बार जांच के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। अब देखना होगा कि इस मामले में जनपद CEO और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।

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