बस्तर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मिली रफ्तार, 3.54 करोड़ से 12 नए क्लासरूम का निर्माण जारी

जगदलपुर, 21 सितंबर 2026। बस्तर जिले के वनांचल क्षेत्रों में जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन द्वारा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के विभिन्न आश्रमों, छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में 3.54 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 12 नए क्लासरूम निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है।
प्रत्येक क्लासरूम के निर्माण के लिए 29.54 लाख रुपये की राशि स्वीकृत एवं जारी की गई है। अलग-अलग विकासखंडों में इन निर्माण कार्यों की प्रगति जारी है। बकावण्ड के कन्या आश्रम बेलपुटी, तोकापाल के बालक आश्रम बुरंगपाल और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास तोकापाल में छज्जा स्तर तक जोड़ाई का कार्य पूरा हो चुका है।
इसी तरह बस्तर विकासखंड के पिपलावण्ड छात्रावास में खिड़की स्तर तक निर्माण पहुंच गया है, जबकि जगदलपुर के नगरनार कन्या छात्रावास में दीवार जोड़ाई का कार्य जारी है। जगदलपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय धुरगुड़ा तथा तोकापाल के बारूपाटा और मावलीभाटा आश्रमों में कॉलम निर्माण का काम चल रहा है।
बास्तानार के बड़े काकलूर और मूतनपाल तथा लोहण्डीगुड़ा के अलनार आश्रम एवं करंजी छात्रावास में नींव और प्लींथ बीम ढलाई का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इन निर्माण कार्यों पर अब तक 23.95 लाख रुपये से अधिक का व्यय दर्ज किया गया है।
14 आश्रम-छात्रावासों में बनेंगे आधुनिक शौचालय
विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में जिले के 14 प्रमुख आश्रमों और छात्रावासों में सर्वसुविधायुक्त शौचालय निर्माण की मंजूरी दी गई है। प्रत्येक शौचालय के लिए 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
इस योजना में लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के मारडूम, बाघनपाल, ककनार, कस्तूरपाल और सुरगुड़ा, जगदलपुर के नेगानार और धुरगुड़ा, बास्तानार के बड़े काकलूर, कोड़ेनार और मूतनपाल, बकावण्ड के चारगांव, पथरी और लावागांव तथा बस्तर ब्लॉक के छोटे आमावाल स्थित शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
दूरस्थ आदिवासी अंचलों में नए क्लासरूम और बेहतर स्वच्छता सुविधाओं के निर्माण से आश्रमों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाएं मजबूत होंगी। साथ ही विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।




