बस्तर आएंगे राहुल गांधी: बोधघाट परियोजना, जंगल कटाई और आदिवासियों के विस्थापन पर कांग्रेस करेगी बड़ी लड़ाई, नवंबर में दौरे की तैयारी

बस्तर, 9 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में खनन, जंगलों की कटाई, आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकार और प्रस्तावित बोधघाट परियोजना को लेकर सियासत तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी नवंबर 2026 में बस्तर का दौरा कर सकते हैं। हालांकि, उनके दौरे की निश्चित तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह जानकारी छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने दी है।
बोधघाट परियोजना के विरोध को धार देने की तैयारी
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के मुताबिक, कांग्रेस ने इस संबंध में कार्ययोजना तैयार की है। पार्टी का मुख्य फोकस प्रस्तावित बोधघाट परियोजना है। महंत ने दावा किया कि इस परियोजना से 56 गांव प्रभावित हो रहे हैं और हजारों परिवारों के विस्थापन की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर बस्तर में विरोध जारी है। कांग्रेस इस आंदोलन को व्यापक रूप देने और आदिवासियों के अधिकारों का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी कर रही है।
बारसूर में किया गया स्थल निरीक्षण
राहुल गांधी के संभावित दौरे की तैयारियों के तहत बारसूर के नजदीक एक स्थल का निरीक्षण किया गया। महंत ने बताया कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष हाल ही में दिल्ली गए थे। इस दौरान राहुल गांधी से मुलाकात हुई और बस्तर के मुद्दों पर चर्चा की गई। स्थल निरीक्षण के बाद सुखदेव भगत दिल्ली लौट गए।
राहुल गांधी ने खुद पूछा- छत्तीसगढ़ में दौरा कहां होना चाहिए?
महंत के अनुसार, मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में खनिज और कोयले के खनन, पेड़ों की कटाई और बोधघाट परियोजना के विरोध से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि इन परिस्थितियों में छत्तीसगढ़ में उनका दौरा कहां होना चाहिए। इसके बाद बस्तर में दौरा कराने पर सहमति बनी।
महंत ने कहा कि बस्तर के आदिवासियों, उनके अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को यहां लाने का निर्णय लिया गया है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने दौरे के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और नवंबर में किसी भी तारीख को बस्तर आ सकते हैं।
खनन और आदिवासी अधिकारों पर केंद्रित रहेगा दौरा
कांग्रेस इस संभावित दौरे के जरिए खनन, जंगलों की कटाई, विस्थापन और आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को प्रमुखता से उठाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि बोधघाट परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों और परिवारों के मुद्दों पर आवाज बुलंद की जाएगी।
हालांकि, राहुल गांधी के दौरे की तारीख और कार्यक्रम का आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में नवंबर में उनके बस्तर पहुंचने की संभावित योजना पर अब राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।




