
जगदलपुर,8 सितम्बर 2026
महापौर संजय पाण्डेय ने झीरम घाटी मामले को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस झीरम की पीड़ा को न्याय का विषय नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सुविधा का हथियार बनाती रही है।
संजय पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस के नेता वर्षों तक दावा करते रहे कि झीरम कांड के सबूत उनकी जेब में हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में पांच साल सरकार चलाने के बावजूद उन्होंने न कथित सबूत जनता के सामने रखे, न जांच को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया और न ही अपने आरोप प्रमाणित किए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस के पास वास्तव में ठोस प्रमाण थे, तो सत्ता में रहते हुए कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि सत्ता जाने के बाद अचानक झीरम की याद और प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति शुरू होना यह दर्शाता है कि कांग्रेस की प्राथमिकता न्याय से अधिक राजनीतिक लाभ हासिल करना है।
महापौर ने कांग्रेस पर नक्सलवाद को लेकर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब सुरक्षा बल नक्सलवाद की कमर तोड़ रहे हैं और बस्तर शांति एवं विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब कांग्रेस का एक वर्ग नक्सल विरोधी कार्रवाई पर सवाल उठाकर नक्सलियों का मनोबल बढ़ाने का काम करता दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि झीरम घाटी की घटना छत्तीसगढ़ के इतिहास का अत्यंत दुखद अध्याय है। इस त्रासदी में जान गंवाने वाले नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के प्रति पूरे प्रदेश की संवेदनाएं हैं। ऐसे गंभीर मामले पर प्रमाणों के साथ निष्पक्ष चर्चा और जांच होनी चाहिए।
संजय पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को कैमरे के सामने आरोप लगाने के बजाय अपने कथित प्रमाण जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “पाँच साल तक सत्ता में रहकर कथित सबूतों पर कुंडली मारकर बैठी कांग्रेस अब प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, अपनी राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन कर रही है। जेब में सबूत होने का दावा करने वाले पहले यह बताएं कि उनकी सरकार के दौरान वह जेब आखिर सिल किसने दी थी?”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को झीरम के शहीदों के नाम पर भ्रम फैलाना बंद करना चाहिए। यदि उसके पास प्रमाण हैं तो उन्हें सक्षम मंच पर रखा जाए, अन्यथा जनता के सामने यह स्पष्ट हो कि झीरम की त्रासदी को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप क्यों लगाया जा रहा है।




