केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव,




,,बस्तर पंडुम 2026 के समापन पर प्रदर्शनी का अवलोकन, विजेता दलों से भेंट कर बढ़ाया उत्साह,,


जगदलपुर 09 फरवरी 2026,। संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के भव्य समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर बस्तर की समृद्ध आदिवासी जीवनशैली, हस्तशिल्प, कलाओं एवं परंपरागत उत्पादों की जानकारी ली और उनकी मुक्तकंठ से सराहना की।
केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस एवं लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा-आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी को देखकर गहरी रुचि दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “बस्तर की जनजातीय संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत और समृद्ध स्वरूप है, जिसे सहेजना हम सभी का दायित्व है।” प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति से जुड़ाव और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं वैद्यराजों द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया, जो जनजातीय ज्ञान की गहराई को दर्शाता है। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी जैसे पेय पदार्थों ने आगंतुकों को आकर्षित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त मंच है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक किरण सिंह देव सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
बस्तर पंडुम 2026 ने एक बार फिर सिद्ध किया कि बस्तर की जनजातीय संस्कृति न केवल अपनी परंपराओं में समृद्ध है, बल्कि अपनी पहचान, कला और जीवन दर्शन के माध्यम से देश-दुनिया को आकर्षित करने की अद्भुत क्षमता रखती है। यह आयोजन जनजातीय गौरव, संरक्षण और सम्मान का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।




