पल्लीभाटा में परंपरागत माघ मड़ई मेला श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न


बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की गौरवशाली लोक-सांस्कृतिक परंपरा मानी जाने वाली मड़ई उत्सव की श्रृंखला के अंतर्गत प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला माघ मड़ई मेला इस वर्ष भी बस्तर विकासखंड के पल्लीभाटा गांव में पारंपरिक श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
यह मेला बस्तर की आदिवासी संस्कृति का प्रमुख पर्व माना जाता है, जिसका आयोजन फसल कटाई के उपरांत दिसंबर से मार्च माह के मध्य किया जाता है। माघ मड़ई के दौरान ग्रामीण जीवन की सामूहिक आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
मेला के अवसर पर गांव की आराध्य देवी दुलारदई माता के मंदिर प्रांगण में क्षेत्र के विभिन्न देवी-देवताओं का पारंपरिक आगमन हुआ। ढोल-मोहरी की गूंजती धुनों के बीच देवी-देवताओं द्वारा मंदिर परिसर की विधिवत परिक्रमा की गई। इस दौरान पुजारियों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
माघ मड़ई मेला का शुभारंभ ग्राम के पटेल, माझी, कोटवार, सरपंच एवं पंचगणों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। माता-बहनों, बच्चों तथा ग्रामीणों ने देवी-देवताओं के दर्शन कर गांव की सुख-शांति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की।
मेले के दौरान पारंपरिक नृत्य-संगीत, ग्रामीण मेल-मिलाप और उत्सव का वातावरण पूरे गांव में छाया रहा। रात्रिकालीन कार्यक्रम के अंतर्गत उड़िया नाटक का आयोजन किया गया, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा और दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया।
कुल मिलाकर पल्लीभाटा का माघ मड़ई मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि इसने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।




