SIR विवाद पर कांग्रेस का EC पर हमला: अभिषेक मनु सिंघवी बोले- ज्ञानेश कुमार ने आयोग को हाईजैक किया, दिल्ली-हरियाणा चुनाव रद्द करने की मांग

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग की सामूहिक व्यवस्था को कमजोर किया है। उन्होंने दिल्ली और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग भी उठाई।
10 महीने में 14 बार आपत्ति का दावा
विवाद की शुरुआत द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, Form-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को अपने संज्ञान या सहमति के बिना उठाए जाने पर सवाल किया और मतदाता डेटा तक पहुंच के केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई।
Form-6 में बदलाव पर भी सवाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े गए थे। इसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या नहीं। इस बदलाव को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि हजारों ERO को जरूरी सिस्टम एक्सेस नहीं मिल रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों और अपीलों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और सभी चुनाव आयुक्तों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कांग्रेस ने इसी आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।
चुनाव आयोग की ओर से रिपोर्ट को खारिज करने की बात
वहीं, सामने आई रिपोर्ट पर चुनाव आयोग ने असहमति जताई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार आयोग का कहना है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने हालांकि इस जवाब के बावजूद SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी SIR को लेकर सुनवाई
दिल्ली में SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने कुछ मतदाताओं को जारी नोटिसों को प्रथम दृष्टया ‘मैकेनिकल’ तरीके से जारी किए जाने की टिप्पणी की और प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त फिल्टर पर विचार करने को कहा।
SIR को लेकर विवाद अब मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया से आगे बढ़कर चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया और डिजिटल सिस्टम के नियंत्रण तक पहुंच गया है।




