हाथियों की मृत्यु जांच होगी और वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ में 78 अधिकारियों को मिला फोरेंसिक प्रशिक्षण

रायगढ़, 8 जून 2026
प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में रायगढ़ में हाथियों की मृत्यु की वैज्ञानिक जांच एवं वन्यजीव अपराधों की पहचान को मजबूत बनाने के लिए दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारी एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” रहा। इसका उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की सटीक पहचान, वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और संरक्षण प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना था।
वन विभाग के अनुसार, वर्तमान में छत्तीसगढ़ में लगभग 450 हाथियों की उपस्थिति है। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार और प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी हाथी की मृत्यु की जांच केवल औपचारिकता नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत अध्ययन है। अधिकारियों को घटनास्थल की सुरक्षा, साक्ष्य संग्रहण और संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान की प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी दिया गया।
कार्यक्रम में वन्यजीव अपराध जांच, साक्ष्य संरक्षण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया तथा न्यायालय में उपयोगी वैज्ञानिक प्रमाणों के संकलन पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को जैविक नमूनों के सुरक्षित संरक्षण और प्रयोगशाला परीक्षणों के लिए आवश्यक मानकों की भी जानकारी दी गई।
दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को फील्ड स्तर पर शव परीक्षण, नमूना संग्रहण, रक्त एवं ऊतक नमूनों के संरक्षण, विष विज्ञान और रोग परीक्षण की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। साथ ही दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से जांच करने की तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया।
प्रशिक्षण में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान तथा वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों पर जानकारी साझा की। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
प्रशिक्षण के समापन पर सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इससे राज्य में फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण की क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार आधारित प्रयास कर रहा है।




