छत्तीसगढ़

रायपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 पर मंथन: जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की रणनीति, 250 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल

रायपुर, 1 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में अहम कदम

क्षेत्रीय अधिकारी पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों की जानकारी देते हुए कहा कि ये नियम केवल कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इसका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन स्वयं करना होगा, जिससे कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी अधिक प्रभावी ढंग से तय हो सके।

स्वच्छता दीदियों का मॉडल बना मिसाल

कार्यशाला में बताया गया कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। वहीं बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर वैज्ञानिक कचरा निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

जीरो वेस्ट स्टेट बनाने पर जोर

पी.के. रबड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सामूहिक प्रयासों के जरिए रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने साझा किए वैज्ञानिक उपाय

कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन की राज्य सलाहकार मोनिका सिंह एवं पुरुषोत्तम पंडा, कार्यपालन अभियंता योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता प्रवीण कुमार नाग ने पावरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण और व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

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