बस्तर के 2,323 पुनर्वासितों को मिला कौशल प्रशिक्षण, नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से खुल रहे रोजगार के नए रास्ते

बस्तर, 28 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना और बस्तर में शांति, विकास एवं समृद्धि को बढ़ावा देना है।
2,323 पुनर्वासितों को दिया गया कौशल प्रशिक्षण
राज्य सरकार के अनुसार, बस्तर संभाग में अब तक कुल 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से 2,323 लोगों को विभिन्न व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह प्रशिक्षण बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद जिलों में प्रदान किया गया है।
प्रशिक्षण के तहत युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर यानी सूर्यमित्र, दोपहिया एवं चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन और सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे रोजगारपरक कार्यों में दक्ष बनाया जा रहा है। इससे उन्हें नौकरी के साथ स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करने में भी मदद मिल रही है।
नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से 50,053 युवाओं को रोजगार
बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित नियद नेल्ला नार योजना 2.0 युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक 1,11,165 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 50,053 युवाओं को नियोजित किया गया है। इनमें आत्मसमर्पित माओवादियों में से 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और 461 युवा वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
इसके अलावा, नक्सल हिंसा से प्रभावित 779 हितग्राहियों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि 191 हितग्राही अभी प्रशिक्षणरत हैं। इन प्रयासों से प्रभावित परिवारों के युवाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के बाद युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर
कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बीजापुर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री के काम और स्वयं सिलाई का कार्य करने के अवसर मिले हैं।
वहीं, बस्तर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और श्रम से जुड़े कार्यों में रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर प्रदान करना है।
छह पुनर्वास केंद्रों को मिली व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता की मान्यता
पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर जिले के केंद्र शामिल हैं।
इसके साथ ही, आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में भी विशेष छूट दी गई है। प्रशिक्षण-पूर्व पंजीयन के समय आधार की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है, जबकि मूल्यांकन से पहले आधार आवश्यक होगा। इसका उद्देश्य दस्तावेजों की कमी के कारण पात्र युवाओं को प्रशिक्षण से वंचित होने से बचाना है।
हर विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की तैयारी
बस्तर के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं तक प्रशिक्षण की सुविधा पहुंचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
बीजापुर जिले में स्किल डेवलपमेंट सेंटर के अंतर्गत असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम में 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। वहीं, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करने के लिए नवीन मद में 780 लाख रुपये यानी 7.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कौशल विकास से आत्मनिर्भरता और पुनर्वास को बढ़ावा
बस्तर में कौशल विकास की ये पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुनर्वास और सामाजिक बदलाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के युवाओं को आजीविका के विकल्प उपलब्ध कराने तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के युवा अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनें और क्षेत्र में शांति, विश्वास, रोजगार एवं समृद्धि की नई संभावनाओं को मजबूत करें।




