
बीजापुर,15 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब चार दशक बाद एक बार फिर पर्यटकों के लिए खुलने जा रहा है। वन विभाग की तैयारी के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से यहां पर्यटन गतिविधियां शुरू होंगी। माओवाद प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाली के बाद यह पहल बस्तर में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।
40 साल बाद खत्म होगा पर्यटकों का इंतजार
दक्षिण बस्तर के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और बाघों के प्राकृतिक रहवास के लिए प्रसिद्ध है। अस्सी के दशक में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण यहां पर्यटकों की आवाजाही बंद हो गई थी।
अब लंबे अंतराल के बाद पर्यटन शुरू करने की तैयारी से वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति के करीब समय बिताने के इच्छुक सैलानियों को इस क्षेत्र का भ्रमण करने का अवसर मिल सकेगा। इसके साथ ही बस्तर की आदिवासी जीवनशैली, लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
NTCA के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार होंगे सफारी रूट
पर्यटकों के सुरक्षित और व्यवस्थित भ्रमण के लिए वन विभाग तैयारियों में जुटा है। छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडेय के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के टाइगर कंजर्वेशन प्लान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पर्यटन क्षेत्रों और सफारी मार्गों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
योजना के तहत सफारी वाहनों की व्यवस्था, मार्गों की मरम्मत और सुरक्षा जांच की जा रही है। पर्यटकों को कोर और बफर जोन के चयनित हिस्सों में भ्रमण कराने की योजना है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन शुरू होने से आसपास के ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वन विभाग स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर नेचर गाइड और वाहन चालक के रूप में जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे स्थानीय समुदाय की आजीविका मजबूत करने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलने की संभावना है।
पर्यटकों की संख्या और बुकिंग व्यवस्था पर जल्द फैसला
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर पर्यटन का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए रिजर्व की कैरींग कैपेसिटी यानी पर्यटकों और वाहनों की दैनिक अधिकतम संख्या का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है।
क्षमता निर्धारित होने के बाद वन विभाग की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग, प्रवेश द्वार, गाइड शुल्क तथा अन्य जरूरी व्यवस्थाओं से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। पर्यटकों को यात्रा से पहले आधिकारिक बुकिंग और प्रवेश संबंधी जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
बस्तर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन की बहाली को बस्तर के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को वन्यजीव पर्यटन और ईको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
जंगल सफारी के माध्यम से पर्यटक क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को करीब से देख सकेंगे। साथ ही, पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को नए दर्शक मिलने की संभावना है।
वन विभाग की ओर से सफारी की बुकिंग, शुल्क और प्रवेश नियमों की आधिकारिक जानकारी जारी होने के बाद पर्यटक अपनी यात्रा की योजना बना सकेंगे।




