बीजापुर में 35 लाख के इनामी 6 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, ओडिशा में सक्रिय 4 कैडर भी शामिल
चार PPCM और दो PM रैंक के कैडर ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, DRG, CRPF और बीजापुर पुलिस के समन्वय से मिली सफलता

बीजापुर, 13 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। कुल 35 लाख रुपये के इनामी छह माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में ओडिशा राज्य में सक्रिय चार माओवादी कैडर भी शामिल हैं। इनमें चार PPCM और दो PM रैंक के कैडर बताए गए हैं। इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की अहम भूमिका रही।
चार माओवादियों पर था 8-8 लाख रुपये का इनाम
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष और कोसा माड़वी उर्फ सतीश शामिल हैं। इन चारों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं, देवे मड़कम उर्फ जन्नी पर दो लाख और लालू ताती पर एक लाख रुपये का इनाम था। पुलिस के मुताबिक, सभी छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
ओडिशा की माओवादी इकाइयों में निभा रहे थे जिम्मेदारी
आत्मसमर्पण करने वाले चार कैडर ओडिशा में सक्रिय कंपनी नंबर 08 और अन्य माओवादी इकाइयों से जुड़े रहे थे। रानी सोढ़ी उर्फ संध्या और पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता PPCM रैंक पर कार्यरत थीं। सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष ओडिशा में वरिष्ठ माओवादी कैडरों की सुरक्षा में तैनात रहा था। वहीं, कोसा माड़वी उर्फ सतीश कंपनी नंबर 02 में PPCM और ए-सेक्शन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहा था।
देवे मड़कम उर्फ जन्नी ओडिशा की कंपनी नंबर 08 में पार्टी सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी थी। लालू ताती गंगालूर एरिया कमेटी से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार, लालू ताती और कोसा माड़वी संगठन से फरार चल रहे थे।
कई बड़ी घटनाओं में शामिल होने का आरोप
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर विभिन्न माओवादी गतिविधियों और सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में शामिल होने के आरोप हैं। रानी सोढ़ी उर्फ संध्या का नाम ओडिशा और महाराष्ट्र में हुई कई घटनाओं में सामने आया है। जनवरी 2026 में ओडिशा के कोनारी जंगल में हुई मुठभेड़ में भी उसकी संलिप्तता बताई गई है। इस मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए थे और दो घायल हुए थे। इस दौरान रानी सोढ़ी के भी घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
कोसा माड़वी उर्फ सतीश पर वर्ष 2006 में NMDC के CISF कैंप, वर्ष 2016 में चेरली CRPF कैंप और वर्ष 2024 में तेकुलगुड़ा CRPF कैंप पर हुए हमलों में शामिल होने का आरोप है। वहीं, लालू ताती का नाम तेकुलगुड़ा की घटना, एलमागुंडा कैंप पर हमले और अन्य माओवादी गतिविधियों में सामने आया है।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले अन्य कैडर भी ओडिशा में माओवादी कैंपों और सुरक्षा बलों से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में शामिल रहे हैं। छह माओवादियों का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।




