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बस्तर बाढ़ त्रासदी पर सांसद महेश कश्यप की बड़ी पहल, PM राहत कोष से ₹500 करोड़ की विशेष सहायता की माँग

जगदलपुर,3 अक्टूबर 2026

चक्रवात अर्नब के प्रभाव से हुई भारी बारिश और ओडिशा के खातीगुड़ा डैम से छोड़े गए पानी के कारण बस्तर संभाग में आई बाढ़ को लेकर सांसद महेश कश्यप ने केंद्र सरकार से विशेष राहत और स्थायी पुनरुद्धार पैकेज की मांग की है। सांसद ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय और जल शक्ति मंत्रालय को पत्र भेजकर तत्काल आर्थिक सहायता, पुनर्वास और दीर्घकालिक समाधान की मांग उठाई है।

सांसद महेश कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में बताया कि सितंबर में हुई अतिवृष्टि और इंद्रावती नदी के उफान से बस्तर, सुकमा और बीजापुर के सैकड़ों गांव और निचले इलाके जलमग्न हुए। बस्तर जिले में करीब 700 कच्चे-पक्के मकान क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है। इसके अलावा सड़क, पुल-पुलिया, कृषि फसलों और जनधन को भी नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मकान निर्माण और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए सांसद ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 500 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है। प्रस्ताव में बस्तर के लिए 300 करोड़ रुपये, सुकमा के लिए 100 करोड़ रुपये और बीजापुर के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि शामिल है।

सांसद ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष भी प्रभावित किसानों और परिवारों के लिए राहत की मांग रखी। उन्होंने खरीफ फसलों के नुकसान का आकलन कर प्रति एकड़ विशेष राहत, क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए मकान और आजीविका सहायता तथा पशुधन और छोटे दुकानदारों को हुए नुकसान का डीबीटी के माध्यम से मुआवजा देने की मांग की।

इंद्रावती नदी और जोरा नाला में जलभराव तथा कटाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सांसद ने आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन, संशोधित डीपीआर और जोरा नाला पर स्वचालित गेटेड कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने केंद्रीय जल आयोग के मार्गदर्शन में इंद्रावती नदी की गाद हटाने के लिए ड्रेजिंग प्रोजेक्ट, जलागम क्षेत्रों में पौधारोपण और मृदा संरक्षण की भी मांग की।

जगदलपुर शहर में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम और नदी तटों पर पक्के गाइड बांध बनाने की मांग भी की गई है।

खातीगुड़ा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से पैदा होने वाले खतरे को देखते हुए सांसद ने केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता में रियल टाइम डेटा शेयरिंग और ऑटोमेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने का आग्रह किया है। इसके जरिए पानी छोड़े जाने से 24 से 48 घंटे पहले निचले इलाकों में अलर्ट और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करने की बात कही गई है।

सांसद महेश कश्यप ने केंद्र सरकार से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के जमीनी सत्यापन के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम को तत्काल बस्तर भेजने और बस्तर के पुनरुद्धार के लिए विशेष राहत पैकेज को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया है।

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