महतारी वंदन योजना पर सियासत: ढाई साल तक किस्त मिलने के बाद हजारों महिलाएं अपात्र, कांग्रेस ने उठाए सवाल

रायपुर,18 सितम्बर 2026
महतारी वंदन योजना के हजारों हितग्राहियों को अपात्र बताए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि जिन महिलाओं को सरकार ने दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र मानकर योजना में शामिल किया, उन्हें करीब ढाई साल तक हर महीने 1 हजार रुपये की किस्त दी गई। अब दोबारा जांच में कई महिलाओं को अपात्र पाए जाने के बाद उनसे पहले मिली राशि वापस जमा करने को कहा जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से सवाल किया कि यदि ये महिलाएं पात्र नहीं थीं तो उन्हें योजना में शामिल किस आधार पर किया गया और इतने समय तक उनके खातों में राशि किस जांच के आधार पर भेजी गई।
27 हजार अपात्र मामलों का दावा
कांग्रेस के मुताबिक, जुलाई 2026 में सामने आए आंकड़ों में प्रदेश में करीब 27 हजार अपात्र प्रकरण पाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें करीब 9 करोड़ रुपये की राशि वापस लेने की बात कही गई थी। रायपुर में 2,883 और रायगढ़ में 1,017 मामले बताए गए थे।
बिलासपुर में 542 महिलाएं अपात्र
हालिया जांच में बिलासपुर में 4 लाख 17 हजार 902 हितग्राहियों के रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी दी गई। इनमें 542 महिलाएं अपात्र पाई गईं। विभाग के अनुसार करीब 30 लाख रुपये वापस लिए जा चुके हैं।
बिलासपुर में महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों के जरिए करीब 1,216 करोड़ रुपये हितग्राहियों के खातों में पहुंचने की जानकारी दी गई है। कांग्रेस ने अब शुरुआती पात्रता जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।
धनंजय ठाकुर का कहना है कि योजना में शामिल करने से पहले महिलाओं से आवेदन लिए गए, दस्तावेजों की जांच की गई और पात्र मानकर भुगतान किया गया। ऐसे में बाद में अपात्र पाए जाने पर सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शुरुआती जांच में गलती कहां हुई।
कांग्रेस का कहना है कि कई महिलाओं ने योजना से मिली राशि को घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरत और बिजली बिल जैसे कार्यों में खर्च किया है। ऐसे में अब पहले मिली रकम वापस मांगने से परिवारों पर आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
कांग्रेस ने मांग की है कि अपात्र घोषित की गई महिलाओं को किस आधार पर अपात्र किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही जिन मामलों में सरकारी जांच के बाद महिलाओं को पात्र मानकर भुगतान किया गया था, उनमें राशि वापस लेने से पहले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाए।




