
जगदलपुर,11 सितम्बर 2026
बस्तर स्थित छत्तीसगढ़ कॉन्टिनेंटल अस्पताल, डिमरापाल में पिता के हृदय संबंधी इलाज के लिए पहुंचे एक युवक और उसके परिवार ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि जांच और इलाज के दौरान उन्हें दो दिनों तक इधर-उधर भटकना पड़ा, वहीं डिस्चार्ज के लिए करीब 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
परिजन रुद्रप्रताप सेठिया के अनुसार, वह अपने पिता के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। पहले दिन डॉक्टर के इंतजार और इलाज में समय बीत गया। अगले दिन सुबह एंजियोग्राफी कराई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने स्टेंट लगाने की बात कही। इसके बाद परिवार ने पिता और अपनी माताजी का इलाज किसी अन्य अस्पताल में कराने की इच्छा जताते हुए डिस्चार्ज मांगा।
परिजन का आरोप है कि डिस्चार्ज मांगने के बाद ऑब्जर्वेशन और बिलिंग से जुड़ी प्रक्रिया का हवाला देकर कई घंटों तक रोके रखा गया। रुद्रप्रताप के मुताबिक डिस्चार्ज की प्रक्रिया सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई, लेकिन मरीज को रात करीब 10 बजे डिस्चार्ज किया गया। इससे दूसरे अस्पताल में समय पर इलाज कराने में भी परेशानी हुई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी समस्या मीडिया के सामने रखने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मीडिया को काम करने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान प्रबंधन और परिजनों के बीच बहस भी हुई।
रुद्रप्रताप सेठिया ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि अस्पताल की सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है। उन्होंने डॉक्टरों के समय पर उपलब्ध नहीं होने और मरीजों की देखभाल में कमी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मरीज को वार्ड में शिफ्ट करने के बाद काफी हद तक नर्सिंग स्टाफ के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से भी अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने और मरीजों एवं उनके परिजनों से सीधे बातचीत करने की मांग की, ताकि अस्पताल की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- व्यवस्था सुधारने में लगेगा समय
इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मरीज और डॉक्टर के बीच क्या हुआ, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक मरीज ठीक नहीं होगा, डॉक्टर उसे भर्ती रखेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल को सुपरस्पेशलिटी अस्पताल बताते हुए कहा कि व्यवस्थाओं को ठीक करने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों का अस्पताल को लेकर विश्वास कमजोर नहीं हो रहा है, बल्कि अस्पताल के प्रति विश्वास कमजोर कराने में कुछ अदृश्य ताकतें लगी हुई हैं।




