मातृभाषा में पढ़ाई को बढ़ावा: डाइट बस्तर में हल्बी, भतरी और गोंडी भाषा की किताबों पर कार्यशाला शुरू

बस्तर, 17 जून 2026
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बस्तर के बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। डाइट बस्तर में मंगलवार से दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई, जिसमें हल्बी, भतरी और गोंडी भाषाओं की पठन सामग्री को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अंतिम रूप दिया जा रहा है।
कार्यशाला का संचालन एफएलएन प्रभारी बेनूराम मौर्य के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसमें तीनों भाषाओं के विशेषज्ञ शिक्षक सामग्री की प्रूफ रीडिंग, भाषागत सुधार और शैक्षणिक उपयुक्तता की समीक्षा कर रहे हैं। श्री मौर्य ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से बच्चों की समझ, सोचने की क्षमता और अभिव्यक्ति में उल्लेखनीय सुधार होता है।
हल्बी भाषा की सामग्री पर कृष्णा सिंह ठाकुर, हिरेंद्र देवांगन और विजय कश्यप, भतरी भाषा पर नेहुरलाल कश्यप, महेंद्र पाण्डेय और मोहित पाण्डेय तथा गोंडी भाषा पर महेश पोयाम, बुधराम कर्मा और भारत कुरुद कार्य कर रहे हैं। एलएलएफ बस्तर की ओर से डीएसी एवं बीएसी तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सभी पाठों, कहानियों और चित्रों को स्थानीय संस्कृति और बच्चों के अनुभवों से जोड़कर अधिक रोचक और सरल बनाया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी स्वयं को पाठ्य सामग्री से बेहतर तरीके से जोड़ सकें।
समीक्षा के बाद परिष्कृत सामग्री को मुद्रण हेतु भेजा जाएगा और नए शैक्षणिक सत्र से पहले प्राथमिक स्कूलों में वितरित किया जाएगा। इससे बस्तर के हजारों बच्चों को मातृभाषा में अध्ययन का अवसर मिलेगा, जिससे प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, ड्रॉपआउट दर में कमी और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।




