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अमृत सरोवर योजना में भ्रष्टाचार के आरोप, मजदूरों को नहीं मिला मेहनताना

बस्तर, 30 मई 2026

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बकावंड ब्लॉक के ग्राम पंचायत सतोषा क्रमांक-2 में योजना के तहत हुए निर्माण कार्य में अनियमितता, मशीनों के उपयोग और मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर मिलीभगत कर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2022 में अमृत सरोवर तालाब निर्माण कार्य शुरू किया गया था। शुरुआती दिनों में फोटो और दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए कुछ ग्रामीणों से काम कराया गया, लेकिन बाद में करीब चार महीने तक जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों से निर्माण कार्य कराया गया। जबकि योजना के नियमों के अनुसार ऐसे कार्यों में स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता देकर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए था।

पीड़ित ग्रामीण सोनसिंग ने बताया कि तालाब निर्माण के लिए गांव के लोगों ने मिलकर काम किया और डीजल खर्च के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये तक जुटाए। कई ग्रामीणों ने अपने निजी ट्रैक्टर भी लगाए और उधार लेकर डीजल भरवाया। इसके बावजूद कार्य पूरा होने के बाद उन्हें मजदूरी और वाहन उपयोग का भुगतान नहीं मिला।

ग्रामीणों का आरोप है कि भुगतान के लिए बार-बार सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार टालमटोल किया गया। लंबे समय तक इंतजार के बाद भी केवल 7 हजार रुपये का भुगतान किया गया, जबकि लाखों रुपये की मजदूरी और अन्य खर्च अभी भी बकाया हैं।

मजदूरी नहीं मिलने से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने अब एसडीएम बकावंड से न्याय की गुहार लगाई है।

इस मामले में बकावंड एसडीएम मनीष वर्मा ने कहा कि अमृत सरोवर निर्माण कार्य में गड़बड़ी और भुगतान नहीं होने की लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि मनरेगा और अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर मशीनों से काम कराया गया, जिससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं मिला और योजना के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचा।

अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी और वर्षों से लंबित मजदूरी भुगतान जल्द जारी किया जाएगा।

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