
जगदलपुर, 30 मई 2026
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विकास निगम जगदलपुर द्वारा भीषण गर्मी के दौरान जनसेवा और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए एक अभिनव अभियान संचालित किया जा रहा है। इस पहल के तहत प्रमुख मार्गों, ग्रामीण क्षेत्रों और हाट-बाजारों के समीप सार्वजनिक शीतल प्याऊ केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां राहगीरों को ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ वनों को दावानल से बचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ वन विकास निगम ने जनसेवा और वन संरक्षण का यह दोहरा अभियान शुरू किया है।
जनसेवा के साथ वन सुरक्षा का संदेश
भीषण गर्मी और तेज हवाओं के चलते इन दिनों वन क्षेत्रों में आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए वन विकास निगम के अधिकारी और कर्मचारी प्याऊ केंद्रों पर आने वाले लोगों को शीतल जल पिलाने के साथ-साथ जंगलों को आग से सुरक्षित रखने का संदेश भी दे रहे हैं।
ग्रामीणों और राहगीरों को समझाया जा रहा है कि उनकी छोटी-सी सावधानी हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र, वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा कर सकती है। अभियान के माध्यम से लोगों को वन संरक्षण के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें पर्यावरण सुरक्षा में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जंगल बचाना सबकी जिम्मेदारी : केदार कश्यप
अभियान के तहत लोगों से अपील की जा रही है कि—
- जंगलों और सड़क किनारे जलती हुई बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली न फेंकें।
- महुआ एवं अन्य लघु वनोपज संग्रहण के दौरान सूखे पत्तों को साफ करने के लिए आग का उपयोग न करें।
- जंगल में आग दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग या वन विकास निगम को सूचना दें।
- वन एवं वन्यजीव संरक्षण को जनआंदोलन बनाकर पर्यावरण सुरक्षा में सहभागी बनें।
ग्रामीणों और राहगीरों ने की सराहना
वन विकास निगम जगदलपुर की इस पहल को स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों और राहगीरों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। लोगों का कहना है कि एक ओर उन्हें भीषण गर्मी में शीतल पेयजल की सुविधा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में संचालित यह अभियान जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल बस्तर सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने और हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




