
दंतेवाड़ा, 26/05/26। जिले में अवैध लौह अयस्क कारोबार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। पंडेवार में दो ट्रक और एक जेसीबी की जब्ती के बाद अब इस पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों के दावों से संकेत मिल रहे हैं कि यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि लंबे समय से संचालित हो रहा संगठित अवैध नेटवर्क हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, पंडेवार से बैलाडीला तक कई स्थानों पर खुले में लौह अयस्क के बड़े-बड़े ढेर पाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ियों से ट्रैक्टरों के जरिए अयस्क नीचे लाया जाता था, जिसके बाद उसे ट्रकों में भरकर बाहर भेजने की तैयारी की जाती थी।
ग्रामीणों के मुताबिक इस काम के लिए कई जगहों पर अस्थायी रास्ते भी बनाए गए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह गतिविधि एक-दो दिन नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी थी। इलाके में पहाड़ियों के नीचे दर्जनों जगहों पर लौह अयस्क के लम्प्स जमा होने की बात कही जा रही है।
जानकारों के अनुसार, एक ट्रक में करीब 40 से 50 टन तक लौह अयस्क लोड किया जाता है। बाजार में एक खेप की कीमत डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक बताई जा रही है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कारोबार से जुड़े लोगों ने बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ कमाया होगा।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि खुले में हो रहा इतना बड़ा अवैध भंडारण आखिर विभागीय निगरानी से कैसे बचता रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौका मिलते ही इस अयस्क को बाहर भेजने की तैयारी थी। मामले के सामने आने के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामले को लेकर डीएफओ ने जांच टीम भेजने और अवैध भंडारण मिलने पर जब्ती की कार्रवाई करने की बात कही है। फिलहाल पूरे इलाके में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कार्रवाई केवल वाहनों तक सीमित रहती है या फिर पूरे अवैध नेटवर्क तक पहुंचती है।




