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700 साल पुरानी परंपरा पर विवाद के बाद प्रशासन ने बदला फैसला, ‘आम दरबार’ की जगह फिर हुआ ‘मुरिया दरबार’

जगदलपुर,19 अक्टूबर 2026

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की करीब 700 साल पुरानी परंपरा मुरिया दरबार के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया। प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम संबंधी पाम्पलेट में मुरिया दरबार की जगह ‘आम दरबार’ लिखे जाने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। मामला चर्चा में आने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को नया पाम्पलेट जारी किया, जिसमें ‘आम दरबार’ की जगह फिर से ‘मुरिया दरबार’ नाम दर्ज किया गया है।

बस्तर की ऐतिहासिक परंपरा है मुरिया दरबार

मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजशाही के दौर में राजा इस दरबार में बैठते थे, जहां गांवों के मांझी-चालकी अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखते थे। राजा उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान करते थे।

राजशाही समाप्त होने के बाद भी यह परंपरा जारी है। वर्तमान समय में मुख्यमंत्री इस दरबार में शामिल होकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जनव्यवस्था का प्रतीक माना जाता है।

पिछले साल अमित शाह हुए थे शामिल, इस बार राष्ट्रपति का कार्यक्रम

पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुरिया दरबार में शामिल हुए थे। वहीं, इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान वे मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनके गांवों की समस्याएं सुनेंगी।

नाम बदलने पर उठे सवाल, प्रशासन ने सुधारा पाम्पलेट

मुरिया दरबार की जगह ‘आम दरबार’ नाम छपने के बाद सोशल मीडिया पर इस बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने नया पाम्पलेट जारी कर नाम में सुधार किया।

यह मामला केवल पाम्पलेट में नाम बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ गया। प्रशासन द्वारा दोबारा ‘मुरिया दरबार’ नाम दर्ज किए जाने के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक विरासत को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

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