जगदलपुर में मनाया गया 26वां विश्व दृष्टि दिवस, बच्चों में नेत्र सुरक्षा के प्रति किया गया जागरूकता अभियान


जगदलपुर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्हारावंड में 26वां विश्व दृष्टि दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। यह कार्यक्रम मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के मार्गदर्शन में अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. वीरेंद्र ठाकुर ने बच्चों को दृष्टिहीनता से बचाव के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि “बच्चों की आंखों की नियमित जांच कराएं और उन्हें चोट व संक्रमण से बचाएं।” डॉ. ठाकुर ने आगे बताया कि विटामिन-ए की कमी से रतौंधी जैसी बीमारी होती है, जिसे रोकने के लिए 9 माह की आयु तक मीजल्स का टीका एवं विटामिन-ए की खुराक आवश्यक है। इसके बाद 3 वर्ष की आयु तक प्रत्येक 6 माह में विटामिन-ए की खुराक दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में अंधत्व निवारण कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. सरिता थॉमस ने बताया कि दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण दृष्टिदोष होता है। जिले के सभी अस्पतालों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आंखों की जांच निशुल्क की जाती है, साथ ही गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त चश्मा उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बच्चों को आंखों को धूल, आतिशबाजी, नुकीले खिलौनों और चोट से बचाने की सलाह दी। डॉ. थॉमस ने कहा कि “आंखों की नियमित सफाई करें और आहार में आम, पपीता, गाजर व हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें।”
प्रदेश में दृष्टिहीनता का मुख्य कारण मोतियाबिंद है, जिसका उपचार आईओएल ऑपरेशन द्वारा किया जाता है। यह ऑपरेशन प्रदेश के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों एवं स्वयंसेवी संस्थानों में निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि मधुमेह (शुगर) के मरीजों में रेटिनोपैथी से भी दृष्टिहीनता का खतरा बढ़ जाता है।
कार्यक्रम में नेत्र सहायक अधिकारी गरिमा मरई (कुम्हारावंड), रयमन बघेल (तिरिया), दिव्या पांडे (अडावल), अनीता मरकाम (सीएससी नानगुर) सहित अस्पताल के सभी अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, पंच-सरपंच, मितानिन और नागरिकों से अपील की गई कि बच्चों की नेत्र सुरक्षा हेतु अधिक से अधिक लोगों को जागरूक कर दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाएं।
संदेश: “पहले दृष्टि, फिर सृष्टि” 👁️✨




