बस्तर दशहरा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में 618 साल पुरानी परंपरा के तहत दंतेवाड़ा से जगदलपुर रवाना हुईं मां दंतेश्वरी की डोली

जगदलपुर,19 अक्टूबर 2026
विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की 618 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए रविवार को महाअष्टमी के अवसर पर मां दंतेश्वरी की पावन डोली और छत्र दंतेवाड़ा से जगदलपुर के लिए रवाना हुए। इस धार्मिक परंपरा के साथ ही बस्तर दशहरा पर्व का महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। मां की डोली के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरे मार्ग में भक्तिमय माहौल नजर आया।
जिया परिवार और पुजारियों ने कंधे पर उठाई मां की डोली
दंतेवाड़ा में पूजा-अर्चना के बाद जिया परिवार और पुजारियों ने मां दंतेश्वरी की डोली को अपने कंधों पर उठाया। डोली के दर्शन के लिए डंकिनी पुल तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। सड़क के दोनों किनारों पर खड़े लोगों ने मां के जयकारे लगाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
पूजा-अर्चना के बाद डोली को विशेष वाहन से जगदलपुर के लिए रवाना किया गया। दंतेवाड़ा से जगदलपुर तक लगभग 80 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद डोली सोमवार सुबह जगदलपुर स्थित जिया डेरा पहुंचेगी। वहां डोली का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद मां दंतेश्वरी की डोली बस्तर दशहरा की विभिन्न पारंपरिक रस्मों में शामिल होगी।
फूल रथ का पहिया और मुख्य लकड़ी टूटने से परिक्रमा प्रभावित
बस्तर दशहरा के दौरान रविवार को फूल रथ की परिक्रमा में तकनीकी व्यवधान आ गया। परिक्रमा के दौरान रथ का एक पहिया और ढांचे की मुख्य लकड़ी टूट गई, जिसके कारण रथ की परिक्रमा शुरू होने में देरी हुई। काफी प्रयासों के बावजूद पहिये को दोबारा जोड़ा नहीं जा सका।
इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी की मदद से रथ को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। प्रशासन के इस कदम से परंपरागत तरीके से रथ खींचने पहुंचे ग्रामीण नाराज हो गए और विरोध करने लगे। सीरहासार चौक पर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ गया। इसी दौरान भीड़ के बीच ट्रैफिक डीएसपी अचानक गिर पड़े। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
तीन महीने बाद बस्तर लौटे विधायक किरण सिंह देव
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव भी मां दंतेश्वरी के दर्शन करने के बाद जगदलपुर पहुंचे और ऐतिहासिक रथ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने क्षेत्रवासियों को नवरात्रि और विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।
मावली मंदिर परिसर में दशहरा समिति के सदस्यों, बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के प्रतिनिधियों, पुजारियों तथा मांझी-चालकी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान किरण सिंह देव ने अपने बड़े भाई कुमार जयदेव के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
स्वास्थ्य लाभ के बाद लगभग तीन महीने बाद क्षेत्र में लौटे किरण सिंह देव ने कहा कि बड़ों के आशीर्वाद और लोगों की दुआओं से वे स्वस्थ होकर वापस आए हैं। उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से वे फिर से जनता की सेवा करेंगे।
आस्था, परंपरा और जनभागीदारी का प्रतीक है बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और जनजातीय संस्कृति के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां दशहरा उत्सव की पहचान केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना, पारंपरिक रस्मों और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी हुई है।
मां दंतेश्वरी की डोली का दंतेवाड़ा से जगदलपुर आगमन इस उत्सव का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस परंपरा में स्थानीय समाज, पुजारियों, मांझी-चालकी और श्रद्धालुओं की भागीदारी बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखती है।
618 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा बस्तर की ऐतिहासिक पहचान, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। मां दंतेश्वरी की डोली के आगमन के साथ ही जगदलपुर में बस्तर दशहरा की धार्मिक गतिविधियों और पारंपरिक आयोजनों को नई गति मिलेगी।




