छत्तीसगढ़बकावंडबस्तर संभाग

चापापदर पंचायत में 92 हजार रुपये के भुगतान पर उठे सवाल, सरपंच-सचिव पर गंभीर आरोप

आदिवासी युवा जिला अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने पंचायत के पिछले दो वर्षों के कार्यों की जांच और भौतिक सत्यापन की उठाई मांग, बोले—पंचायत की राशि का देना होगा पूरा हिसाब

बकावंड 27 अक्टूबर 2026

बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत चापापदर में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए भुगतान को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पंचायत के एक भुगतान संबंधी वाउचर के सामने आने के बाद अब कार्य की वास्तविक स्थिति और खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। आदिवासी युवा जिला अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए पंचायत की राशि के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।

92,500 रुपये के भुगतान का वाउचर आया सामने

जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ग्राम पंचायत चापापदर का एक भुगतान वाउचर दर्ज है। इसमें स्नानघाट निर्माण कार्य के नाम पर 92,500 रुपये की राशि भुगतान दर्शाई गई है।

वाउचर का विवरण इस प्रकार है—

  • वाउचर क्रमांक: XVFC/2026-27/P/6
  • भुगतान दिनांक: 08 जून 2026
  • भुगतान राशि: 92,500 रुपये
  • कार्य का विवरण: स्नानघाट निर्माण कार्य, दासी मुंडा की राशि भुगतान।

पोर्टल पर भुगतान दर्ज होने के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति क्या है और भुगतान के अनुरूप मौके पर कितना काम हुआ है। हालांकि, निर्माण कार्य की स्थिति और भुगतान की वैधता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

लखेश्वर कश्यप ने लगाए गंभीर आरोप, जांच की मांग

इस मामले को लेकर आदिवासी युवा जिला अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने पंचायत के सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत में आने वाली विकास राशि जनता की संपत्ति है और उसका उपयोग गांव के विकास के लिए होना चाहिए।

कश्यप ने आरोप लगाते हुए कहा, “सरपंच और सचिव पंचायत का पैसा डकार रहे हैं। पंचायत का पैसा कहां और किस काम में खर्च हुआ, इसका पूरा हिसाब देना होगा। पंचायत में पारदर्शिता जरूरी है, तभी गांव का वास्तविक विकास संभव है। बिना काम के फर्जी तरीके से बिल निकालने का सिलसिला बंद होना चाहिए।”

उन्होंने जिला प्रशासन से ग्राम पंचायत चापापदर में पिछले दो वर्षों के दौरान 15वें वित्त आयोग सहित अन्य मदों से कराए गए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराकर ग्रामसभा में आय-व्यय और कार्यों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है।

कलेक्टर और जनपद सीईओ से कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कलेक्टर बस्तर और जनपद पंचायत बकावंड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत की राशि से स्वीकृत और भुगतान किए गए प्रत्येक कार्य की जमीनी स्तर पर जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ है या नहीं।

सरपंच-सचिव का पक्ष नहीं आया सामने

मामले में ग्राम पंचायत चापापदर के सरपंच और सचिव से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली सरकारी राशि का उद्देश्य गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीणों को बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना है। ऐसे में 92,500 रुपये के भुगतान को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच और दस्तावेजों के माध्यम से सामने आना जरूरी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत बकावंड इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या पंचायत के पिछले दो वर्षों के कार्यों का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराकर ग्रामीणों के सामने वास्तविक स्थिति रखी जाती है। क्योंकि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और जनता को उसका हिसाब जानने का पूरा अधिकार है।

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