मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान से सोमारू राम की जिंदगी में लौटा उजाला, मोतियाबिंद के सफल ऑपरेशन से मिली नई रोशनी

जगदलपुर, 16 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। अभियान के तहत तोकापाल विकासखंड की ग्राम पंचायत छापरभानपुरी के 68 वर्षीय सोमारू राम की आंखों की रोशनी लौट आई है। दोनों आंखों में मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीन हो चुके सोमारू राम अब आत्मनिर्भर होकर अपने दैनिक कार्य कर रहे हैं।
लाठी के सहारे चलता था जीवन, दूसरों पर थे निर्भर
सोमारू राम की दोनों आंखों में मोतियाबिंद होने के कारण उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई थी। स्थिति ऐसी थी कि उन्हें बिना लाठी के चलना भी मुश्किल हो गया था। दैनिक जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस वजह से वे मानसिक तनाव और सामाजिक उपेक्षा का सामना कर रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से मिला उपचार
इसी दौरान मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के अंतर्गत यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छापरभानपुरी में पदस्थ ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट ऑफिसर सुदीप प्रमाणिक ने उनकी आंखों की जांच की। जांच में दोनों आंखों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें ऑपरेशन के लिए तैयार किया और जरूरी परामर्श तथा रेफरल की प्रक्रिया पूरी कराई। समय पर उपचार और सफल ऑपरेशन के बाद सोमारू राम की आंखों की रोशनी लौट आई।
अब खुद कर रहे घर निर्माण और खेती के काम
आंखों की रोशनी वापस आने के बाद सोमारू राम के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें चलने के लिए लाठी या किसी दूसरे के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती। वे अपने दैनिक कार्य स्वयं करने के साथ परिवार के लिए घर बनाने में भी जुटे हैं। इसके अलावा खेती-किसानी के कामों में भी हाथ बंटा रहे हैं।
सोमारू राम ने भावुक होकर बताया कि पहले उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता था और हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। सफल उपचार से उन्हें नई जिंदगी मिली है। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और शासन के प्रति आभार जताया।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान की यह सफलता बताती है कि समय पर जांच, उचित परामर्श और उपचार की सुविधा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सोमारू राम की कहानी न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता को दर्शाती है, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीवन जीने की नई प्रेरणा भी देती है।




