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बस्तर न्यूज अपडेट: दशहरा में फूल रथ की भव्य परिक्रमा, 12 आदिवासी युवतियों ने लगाया शोषण का आरोप, 700 शिक्षकों का प्रदर्शन, छात्रावासों में लापरवाही पर कार्रवाई और केके रेललाइन ठप होने से बढ़ी परेशानी

जगदलपुर,14 अक्टूबर 2026

बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा एक बार फिर आस्था और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ रही है। 13 अक्टूबर से जगदलपुर में चार पहियों वाले विशाल फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है। मंगलवार देर रात रथ की पहली परिक्रमा पूरी हुई, जिसमें जगदलपुर और तोकापाल विकासखंड के 36 गांवों से पहुंचे 400 से अधिक ग्रामीणों ने भाग लिया।

परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी के प्रतिनिधि स्वरूप उनके छत्र को दंतेश्वरी मंदिर से लाकर प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी ने फूल रथ पर विराजित किया। पूजा-अर्चना के बाद सिरहासार चौक से रथ रवाना हुआ। ग्रामीणों ने रथ को खींचकर गोलबाजार और मावली माता मंदिर की परिक्रमा कराई। रथ रवाना होने से पहले जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर माता को सलामी दी।

करीब 52 घन मीटर लकड़ी से तैयार विशाल फूल रथ बस्तर की अनूठी धार्मिक विरासत का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी पांच दिनों तक मावली माता मंदिर की परिक्रमा करेंगी।

दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदय चंद्र पाणिग्राही के अनुसार, पहले बस्तर महाराजा माता का छत्र लेकर रथ पर सवार होते थे, जबकि अब यह जिम्मेदारी प्रधान पुजारी निभाते हैं। मान्यता है कि काकतीय नरेश पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के बाद रथपति की उपाधि से जुड़ी परंपरा बस्तर में शुरू हुई थी। आज भी ग्रामीणों के सामूहिक श्रम और आस्था से निभाई जाने वाली यह परंपरा बस्तर दशहरा को देश के विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजनों में पहचान दिलाती है।

रोजगार के वादे पर बेंगलुरु गईं सुकमा की 12 आदिवासी युवतियां, शोषण का आरोप

सुकमा। बेहतर भविष्य और रोजगार की उम्मीद लेकर बेंगलुरु पहुंचीं सुकमा की 12 आदिवासी युवतियों ने कथित धोखाधड़ी और शोषण की शिकायत की है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाली युवतियों का आरोप है कि उन्हें नौकरी के नाम पर किए गए वादों के अनुरूप काम और सुविधाएं नहीं मिलीं।

युवतियों के मुताबिक, उन्हें 22 हजार रुपये मासिक वेतन, मुफ्त रहने-खाने और आठ घंटे की ड्यूटी का भरोसा दिया गया था। उन्हें जनरल ड्यूटी असिस्टेंट (GDA) के पद पर काम देने की बात कही गई थी, लेकिन आरोप है कि मरीजों की देखभाल के साथ उनसे बर्तन धोने, झाड़ू-पोंछा लगाने और अन्य घरेलू काम भी कराए गए। उनका दावा है कि कई बार ड्यूटी करीब 24 घंटे तक चलती थी और भोजन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी।

प्रभावित युवतियों का कहना है कि लगभग छह महीने की प्रशिक्षण प्रक्रिया के बाद भी उन्हें वादे के मुताबिक रोजगार नहीं मिला। काम छोड़कर सुकमा लौटने की बात कहने पर उनसे पैसे मांगने और चोरी के मामले में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

पायल कुलदीप, हिमानी सुना, कल्याणी नाग, सुनीता पोडियामी, मीडियम और संगीता सहित प्रभावित युवतियों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने प्रशिक्षण कराने वाली इनविजन संस्था और बेंगलुरु की दर्शन एल्डर प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका की जांच कराने, कथित बकाया वेतन दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

युवतियों ने छत्तीसगढ़ में ही अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने की अपील भी की है। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आना बाकी है।

दंतेवाड़ा के गौरव पथ पर लिखित आदेश के बाद भी खड़े ट्रक, यातायात व्यवस्था पर सवाल

दंतेवाड़ा। जिले के बचेली में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस की ओर से निर्देश जारी किए जाने के बावजूद गौरव पथ पर भारी वाहनों की पार्किंग की समस्या बनी हुई है। नंदराज पेट्रोल पंप से पुराने मार्केट तक सड़क के दोनों ओर खड़े ट्रक और भारी वाहन आम नागरिकों के आवागमन में परेशानी पैदा कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी ने 9 अक्टूबर 2026 को बैलाडीला ट्रक एसोसिएशन को लिखित पत्र जारी कर सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों को हटाने के निर्देश दिए थे। इससे पहले हुई बैठक में भी तय किया गया था कि वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद गौरव पथ के दोनों ओर ट्रकों की पार्किंग नहीं की जाएगी।

नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन मालिकों और चालकों के खिलाफ जुर्माना तथा वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद सड़क पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से पुलिस के निर्देशों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

नवरात्रि और दशहरा के दौरान दंतेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों से यातायात बाधित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इससे दोपहिया वाहन चालकों और आम नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।

नगरवासियों ने गौरव पथ को भारी वाहनों की पार्किंग से मुक्त कराने और निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।

सुकमा में बीईओ मनोज दुबे के खिलाफ 700 से अधिक शिक्षकों का प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

सुकमा। जिले के छिंदगढ़ विकासखंड में शिक्षा विभाग का विवाद अब बड़े शिक्षक आंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी मनोज दुबे को पद से हटाने की मांग को लेकर मंगलवार को 700 से अधिक शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने पंचायत भवन से तहसील कार्यालय तक रैली निकाली और कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

शिक्षक संघ का आरोप है कि बीईओ की कथित प्रताड़ना से शिक्षक परेशान हैं। इस मामले में पहले भी जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी, जनप्रतिनिधियों और शिक्षा मंत्री तक शिकायतें की जा चुकी हैं। संघ के मुताबिक, कई बार ज्ञापन और पत्राचार के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

ब्लॉक अध्यक्ष धंसाया नाग ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर दशहरा अवकाश समाप्त होते ही शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर सकते हैं। शिक्षक जगन्नाथ नाग ने भी कहा कि शिकायतों की सुनवाई नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।

प्रदर्शन को स्कूल सफाई कर्मचारी संघ, ब्लॉक कांग्रेस और बस्तरिया राज मोर्चा का समर्थन भी मिला। शिक्षकों की बड़ी संख्या में भागीदारी के कारण क्षेत्र के कुछ स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।

अब प्रशासन के सामने शिक्षकों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने और स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। आंदोलन के बीच सवाल यह है कि क्या दशहरा अवकाश के बाद टकराव बढ़ेगा या प्रशासन समय रहते समाधान निकाल पाएगा।

सुकमा के आश्रम-छात्रावासों में कमियां मिलने पर कार्रवाई, 15 अधीक्षकों को नोटिस

सुकमा। जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में संचालित आश्रमों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर आवासीय शिक्षण संस्थाओं का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण प्रतिवेदनों की समीक्षा में कुछ संस्थाओं में निर्धारित रोस्टर का पालन नहीं होने और मूलभूत सुविधाओं में कमियां मिलने की बात सामने आई।

इसके बाद प्रशासन ने संबंधित संस्थाओं के अधीक्षकों और अधीक्षिकाओं से जवाब तलब किया है। बालक आश्रम गुट्टागुड़ा, नीलावरम, मुनगा, नामापारा और मिरीवाड़ा सहित विभिन्न संस्थाएं कार्रवाई के दायरे में हैं। कन्या आश्रम चिंगावरम, पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास सुकमा तथा कोंटा, तोंगपाल और अन्य स्थानों के छात्रावासों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

कुल 15 संस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस मिलने के दो दिन के भीतर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि आवासीय संस्थाओं में बच्चों के पोषण, रहने की सुविधा, अनुशासन और शिक्षा की व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए आश्रम और छात्रावास शिक्षा के साथ सुरक्षित जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं।

ऐसे में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करना और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। अब संबंधित अधीक्षकों के जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

रावघाट-रायपुर मेमू ट्रेन सेवा की चर्चा तेज, नारायणपुर तक रेल पहुंचने का इंतजार बरकरार

नारायणपुर। जिले में रेल कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं, लेकिन जिला मुख्यालय तक ट्रेन पहुंचने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। रेलवे बोर्ड के एक पत्र में रावघाट और रायपुर के बीच प्रस्तावित मेमू ट्रेन सेवा की समय-सारणी और संचालन संबंधी निर्देशों का उल्लेख है।

प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, ट्रेन रावघाट से सुबह 6:30 बजे रवाना होकर दोपहर 1:05 बजे रायपुर पहुंचेगी। वहीं, रायपुर से दोपहर 1:20 बजे रवाना होकर शाम 7 बजे रावघाट पहुंचने का प्रस्ताव है। ट्रेन के प्रमुख ठहरावों में ताड़ोकी, दल्लीराजहरा और दुर्ग शामिल बताए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार, शनिवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन ट्रेन चलाने का उल्लेख है।

हालांकि, उपलब्ध पत्र में नारायणपुर स्टेशन तक ट्रेन चलाने या रेल लाइन को जिले तक बढ़ाने की स्पष्ट मंजूरी का उल्लेख नहीं है। इसलिए प्रस्तावित रावघाट-रायपुर सेवा को नारायणपुर तक रेल पहुंचने की पुष्टि मानना फिलहाल सही नहीं होगा।

अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में रेल संपर्क का विस्तार होने से विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय कृषि उत्पादों, कारोबार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।

हालांकि, इसके लिए अलग सर्वेक्षण, विस्तृत योजना, स्वीकृति और निर्माण जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। नारायणपुर के लोगों की निगाह अब इस बात पर है कि रावघाट तक रेल संपर्क की पहल के बाद जिले और अबूझमाड़ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।

केके रेललाइन पर भू-स्खलन से यात्री और मालगाड़ी सेवाएं प्रभावित, 22 अक्टूबर से पहले बहाली मुश्किल

जगदलपुर। बस्तर की रेल कनेक्टिविटी पर भारी बारिश और भू-स्खलन का असर जारी है। केके रेललाइन पर मल्लीगुड़ा रेलवे स्टेशन के समीप हुए भू-स्खलन के कारण जगदलपुर की ओर यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित है। जानकारी के अनुसार, 25 सितंबर को भारी बारिश के दौरान करीब 60 मीटर पटरी के नीचे की मिट्टी बह गई थी, जिससे रेल मार्ग असुरक्षित हो गया।

इस घटना के बाद से यात्री ट्रेनें कोरापुट तक ही संचालित हो रही हैं और बस्तर की ओर रेल सेवा बहाल होने का इंतजार किया जा रहा है। रेलवे कर्मचारी और मशीनें क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत में जुटे हैं। राहत कार्य में एक दर्जन से अधिक जेसीबी और करीब 200 मजदूर लगाए जाने की जानकारी दी गई है।

स्टेशन मास्टर श्याम सुंदर चंद्रा के अनुसार, नुकसान की गंभीरता को देखते हुए 22 अक्टूबर से पहले रेल परिचालन बहाल होना मुश्किल है। उन्होंने आशंका जताई कि मरम्मत के दौरान दोबारा बारिश होने पर काम प्रभावित हो सकता है और बहाली में और देरी हो सकती है।

रेल मार्ग बाधित होने का असर माल परिवहन पर भी पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, करीब 40 मालगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे लौह अयस्क के परिवहन और बस्तर को विशाखापत्तनम तथा रायगढ़ की दिशा से जोड़ने वाली रेल व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

अब यात्रियों और कारोबारियों की निगाह मरम्मत कार्य पूरा होने और सुरक्षित रेल परिचालन बहाल होने पर टिकी है। रेलवे के सामने चुनौती केवल पटरी की मरम्मत नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र में भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के उपाय सुनिश्चित करने की भी है।

मुआवजे पर भड़के बाढ़ प्रभावित किसान, सर्वे टीम को लौटाया; वास्तविक नुकसान के आकलन की मांग

बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड जनपद के धोबीगुड़ा गांव में बाढ़ प्रभावित किसानों ने राहत राशि को अपर्याप्त बताते हुए नाराजगी जताई है। सरकार की ओर से घोषित 8 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे से असंतुष्ट किसानों ने राजस्व सर्वे टीम को बिना मुआयना किए वापस लौटा दिया।

किसानों का कहना है कि हालिया बाढ़ में धान सहित दूसरी फसलें बर्बाद हो गई हैं। इससे अगली खेती और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। इंद्रावती नदी के आसपास स्थित धोबीगुड़ा, मालगांव, गुमडेल, कोरपाल, कानापाल, उलनार, कारितगांव और बजावंड जैसे गांवों में फसल नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं।

प्रभावित किसानों के मुताबिक, एक एकड़ में करीब 21 क्विंटल धान की उपज होती है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 हजार रुपये बैठती है। उनका कहना है कि बीज, खाद, दवा, जुताई और मजदूरी सहित खेती की लागत करीब 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है। ऐसे में पूरी फसल नष्ट होने के बाद घोषित सहायता राशि वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद कम है।

किसानों की मांग है कि खेतों में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए और उसी के अनुरूप मुआवजा तय किया जाए। ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा के सरपंच संतोष कश्यप ने किसानों को समझाइश देते हुए उनकी मांग जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने की पहल की है। उन्होंने प्रभावित किसानों से सांसद महेश कश्यप से मिलकर सामूहिक रूप से अपनी बात रखने की अपील की है।

अब प्रशासन के सामने किसानों की आपत्तियों का समाधान करने, नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने और राहत राशि को लेकर भरोसा बहाल करने की चुनौती है।

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