बस्तर के बड़े बोदल में पादरियों के प्रवेश पर रोक, ग्रामसभा ने पेसा कानून का हवाला देकर पारित किया प्रस्ताव

जगदलपुर,15 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के नानगुर क्षेत्र स्थित बड़े बोदल गांव में ग्रामसभा ने पादरियों के प्रवेश और बाहरी धार्मिक प्रार्थना सभाओं को लेकर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामसभा ने इस निर्णय के पीछे आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक आस्था और रूढ़िगत मान्यताओं के संरक्षण का तर्क दिया है। इस संबंध में गांव के प्रमुख स्थल अटल चौक पर सूचना बोर्ड भी लगाया गया है।
ग्रामसभा की अनुमति के बिना धार्मिक आयोजनों पर रोक
गांव में लगाए गए सूचना बोर्ड के अनुसार, ग्राम क्षेत्र में बाहरी धार्मिक गतिविधियां या प्रार्थना सभाएं आयोजित करने से पहले ग्रामसभा की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बोर्ड में बिना पूर्व स्वीकृति धर्म प्रचारकों और पादरियों के प्रवेश तथा सामूहिक धार्मिक आयोजनों पर रोक का उल्लेख किया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है।
पेसा कानून के तहत अधिकारों का दावा
ग्रामसभा ने अपने फैसले के समर्थन में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून का हवाला दिया है। इस कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को स्थानीय परंपराओं, रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े अधिकार प्राप्त हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय आदिवासी संगठनों का कहना है कि बाहरी धार्मिक गतिविधियों से गांव की पारंपरिक देव परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर ग्रामसभा ने ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करने की बात कही है।
धार्मिक स्वतंत्रता और ग्रामसभा के अधिकारों पर बहस
इस निर्णय ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता और ग्रामसभा के अधिकारों के बीच कानूनी संतुलन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। हालांकि, यह अधिकार लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी संवैधानिक सीमाओं के अधीन है।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि पेसा कानून के तहत ग्रामसभा किस सीमा तक किसी व्यक्ति के प्रवेश या धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सकती है। इस मामले में ग्रामसभा के प्रस्ताव और सूचना बोर्ड पर किए गए कानूनी दावों का विधिक परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक सद्भाव पर जोर
बड़े बोदल गांव में सूचना बोर्ड लगाए जाने के बाद मामले को लेकर प्रशासनिक सतर्कता और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता सामने आई है। स्थानीय स्तर पर शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण हो सके और संवैधानिक अधिकारों का भी सम्मान बना रहे।




