कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र, जिप्सी सफारी के साथ गुफा और बम्बू राफ्टिंग का मिलेगा रोमांच

बस्तर, 21 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित प्रसिद्ध कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में इस वर्ष पर्यटकों के लिए सफारी सत्र निर्धारित समय से 12 दिन पहले शुरू कर दिया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और निर्देशानुसार पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। नए सत्र के शुरू होने से पर्यटक बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और रोमांचक पर्यटन गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।
मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तम गुप्ता ने मंगलवार को सत्र का पहला टिकट जारी कर जिप्सी सफारी का शुभारंभ किया। मानसून के बाद शुरू हुए इस पर्यटन सत्र में पर्यटकों को कांगेर घाटी की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वे कोटमसर गुफा, कांगेर धारा और प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात का भ्रमण भी कर सकेंगे।
जिप्सी सफारी के साथ बम्बू राफ्टिंग और कयाकिंग का रोमांच
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों के लिए इस बार प्रकृति भ्रमण के साथ कई रोमांचक गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पर्यटक मांझीपाल में बम्बू राफ्टिंग और कयाकिंग का आनंद ले सकेंगे। जंगल, झरनों, गुफाओं और प्राकृतिक जलधाराओं से भरपूर यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और रोमांचक पर्यटन के शौकीनों के लिए खास अनुभव प्रदान करेगा।
सफारी सत्र निर्धारित समय से पहले शुरू होने से पर्यटकों को बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को देखने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
धुरवा जनजातीय नृत्य होगा विशेष आकर्षण
कांगेर घाटी आने वाले पर्यटकों को बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए कोटमसर बैरियर पर धुरवा जनजातीय नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। इको विकास समिति की इस पहल के माध्यम से पर्यटक स्थानीय परंपराओं, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जान सकेंगे।
इस आयोजन से स्थानीय जनजातीय संस्कृति को पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
प्लास्टिक मुक्त सफारी पर विशेष जोर
राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को प्राथमिकता दी गई है। उद्यान के निदेशक गौतम नारायण पडिभार के निर्देशानुसार उद्यान क्षेत्र में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रबंधन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे सफारी के दौरान प्लास्टिक की बोतलें और पॉलीथिन साथ न लाएं तथा उद्यान की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्यटकों से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आग्रह किया गया है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में समय से पहले सफारी सत्र की शुरुआत से बस्तर के पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। प्राकृतिक सौंदर्य, साहसिक गतिविधियों, जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संगम इस बार पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।




