
,,बस्तर के सुदूर तुआरास-चितापुर की महिला समूह को रायपुर के ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम में मिला सम्मान,
जगदलपुर, 15 मार्च 2026,। बस्तर जिले के दरभा विकासखंड अंतर्गत सुदूर ग्राम तुआरास-चितापुर की महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित “उत्पादक समूह आजीविका इमली प्रसंस्करण समिति” की महिलाओं ने पारंपरिक रूप से संग्रहित होने वाली इमली को आधुनिक प्रसंस्करण के माध्यम से लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया है।
समूह की महिलाओं द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए हाल ही में राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम में उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके प्रयासों की सराहना है, बल्कि बस्तर की ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी का भी प्रतीक है।
समिति की कार्यप्रणाली पूरी तरह संगठित और गुणवत्ता पर आधारित है। समूह की महिलाएं स्वयं इमली की खरीदी करती हैं और उसके बाद सावधानीपूर्वक उसका रेशा और बीज निकालकर उसे शुद्ध करती हैं। इसके बाद उसी इमली से उच्च गुणवत्ता वाला ‘इमली फूल’ और विशेष रूप से ‘इमली चपाती’ जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।
समिति की सदस्य पदमिनी कश्यप बताती हैं कि ग्राहकों की सुविधा और बाजार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों की 200 ग्राम, 500 ग्राम और 1000 ग्राम के आकर्षक पैकेटों में पैकेजिंग की जा रही है और समूह की महिलाएं स्वयं इनका विक्रय भी कर रही हैं।
महिला समूह की इन दीदियों ने यह साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से प्रसंस्करण किया जाए, तो आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह आसान हो सकती है। बिहान योजना के माध्यम से संगठित होकर इन महिलाओं ने अपनी आय में वृद्धि के साथ-साथ ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है।
कार्यक्रम में इन महिलाओं की मेहनत, लगन और उद्यमशीलता की मुक्त कंठ से सराहना की गई। आज दरभा की ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि पूरे बस्तर संभाग के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
दरभा की इन महिलाओं की सफलता यह संदेश देती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण अंचल की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं। यह सम्मान बस्तर की उन सैकड़ों महिलाओं की सामूहिक मेहनत की जीत है, जो अब आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।




