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**जब बस्तर के अंदरूनी गांव में जली शिक्षा की मशाल, घाटलोहंगा में सावित्रीबाई फुले जयंती पर रचा गया सामाजिक इतिहास**


जगदलपुर। क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती पर बस्तर जिले के अंदरूनी गांव ग्राम घाटलोहंगा में शिक्षा और सामाजिक चेतना का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। पहली बार गांव में सावित्रीबाई फुले की जयंती पूरे सम्मान, गरिमा और जनभागीदारी के साथ मनाई गई, जिसने बस्तर के सामाजिक इतिहास में एक नई इबारत लिख दी।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में उठाया गया एक सशक्त कदम साबित हुआ। कार्यक्रम का मार्गदर्शन ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू ने किया। इस अवसर पर बस्तर संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदू, संभागीय उपाध्यक्ष रामेश्वर बिसाई, संभागीय उपाध्यक्ष तुलसीराम ठाकुर तथा बस्तर जिला अध्यक्ष रघुवंश यादव की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे आयोजन को दिशा और प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक समाज सुधारक नहीं थीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक क्रांति की जननी थीं, जिन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
जयंती के अवसर पर गांव में भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रेरणादायी प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब सामने आया, जब गांव की बालिकाओं ने कविता पाठ के माध्यम से सावित्रीबाई फुले के जीवन परिचय को प्रस्तुत किया। यह दृश्य इस बात का सशक्त प्रमाण था कि शिक्षा की अलख अब बस्तर के दूरस्थ अंचलों तक पहुंचने लगी है।
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे सावित्रीबाई फुले के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित, जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। घाटलोहंगा में मनाई गई यह जयंती शिक्षा और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में याद रखी जाएगी।

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