
डमरू कश्यप
बकावंड, 26 फ़रवरी 2026। Chhattisgarh के बस्तर अंचल में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बकावंड ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत तोगकोगेरा के आश्रित ग्राम आमादुला में प्राथमिक शाला का नया भवन तीन साल से अधूरा पड़ा है। पुराना जर्जर भवन तोड़कर नए निर्माण का दावा किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका। अधूरी दीवारें और बिना छत का ढांचा प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है।
स्थिति यह है कि प्राथमिक शाला के बच्चों को मजबूरी में क्रमांक 6 आंगनबाड़ी केंद्र में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। एक ही परिसर में आंगनबाड़ी के नन्हे बच्चों और प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। न पर्याप्त जगह, न बुनियादी संसाधन और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम—ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
निर्माण शुरू, लेकिन जिम्मेदारी अधूरी
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही और संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। तीन वर्ष पहले भवन निर्माण की शुरुआत तो हुई, लेकिन इसके बाद कार्य की गति थम गई। न तो नियमित मॉनिटरिंग हुई और न ही समय-सीमा तय कर काम पूरा कराया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारी और जनपद पंचायत स्तर के अधिकारियों ने अब तक गंभीरता नहीं दिखाई। यदि समय पर निरीक्षण और जवाबदेही तय की जाती, तो बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में असुविधाजनक माहौल में पढ़ाई करने की नौबत नहीं आती।
शिक्षा सुधार के दावों पर सवाल
राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन आमादुला की स्थिति उन दावों की हकीकत उजागर कर रही है। अधूरा स्कूल भवन न केवल प्रशासनिक सुस्ती का प्रमाण है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को भी दर्शाता है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और पूर्ण स्कूल भवन उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिसे अब और टाला नहीं जा सकता।
अब देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग और प्रशासन कब संज्ञान लेते हैं और आमादुला के विद्यार्थियों को उनका मूल अधिकार—सुरक्षित व समुचित शैक्षणिक वातावरण—कब उपलब्ध कराया जाता है।




