
जगदलपुर, 28 फरवरी 2026। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में कृषि कॉलेज सभागार में किया गया। समारोह में विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार, शोध और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस वैज्ञानिकों के योगदान को याद करने और युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि नवाचार और शोध की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में माताओं-बहनों को भी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा बस्तर में वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा दी जाएगी।
इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘विज्ञान तीर्थ दर्शन अभियान’ शुरू करने की घोषणा की। इस अभियान के तहत युवा वैज्ञानिकों को देश के प्रमुख वैज्ञानिकों के जन्मस्थलों का अध्ययन भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने ‘दण्डकारण्य आमचो बस्तर विज्ञान महोत्सव’ का विमोचन भी किया। यह महोत्सव मार्च से सितंबर 2026 तक आयोजित होगा। इसके अंतर्गत सोझ-गोठ (छात्र-वैज्ञानिक संवाद), जोहार प्रकृति (ग्राम समिति कार्यशाला), बस्तर अनुसंधान (लोक विज्ञान सम्मेलन), लोक-वैद्य सभा (पारंपरिक वैद्यक अध्ययन एवं कार्यशाला) और विकास यात्रा (गोलमेज संगोष्ठी) जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समारोह में भोपाल और रायपुर से आए विभिन्न वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवीनतम आयामों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार करना और समाज में विज्ञान के महत्व को रेखांकित करना रहा।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. प्रशांत कवीश्वर, सीएसआईआर भोपाल के निदेशक डॉ. थल्लाडा भास्कर, विज्ञान भारती के विवस्वान और बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।




