
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया है और उन्हें इस मामले में हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि PMLA के प्रावधानों में कोई कानूनी खामी नहीं है। जस्टिस बागची ने कहा, “The devil is not in the law but in the abuse,” यानी गलती कानून में नहीं, उसके दुरुपयोग में है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच का उद्देश्य केवल आरोपी की सच्चाई तय करना नहीं है, बल्कि अपराध की जांच भी होती है और इस प्रक्रिया में कोई रोक नहीं लगनी चाहिए।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि ED (एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट) समय-समय पर पूरक शिकायत दर्ज कर ट्रायल में देरी कर रहा है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आगे की जांच आरोपी के हित में भी हो सकती है, बशर्ते इसका दुरुपयोग न हो।
जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि आगे की जांच के लिए ED को विशेष PMLA कोर्ट से पूर्व अनुमति लेनी चाहिए, लेकिन अगर ऐसा नहीं हो रहा तो यह प्रावधान की समस्या नहीं बल्कि उसके पालन की कमी है।
सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की याचिका खारिज करते हुए उन्हें हाईकोर्ट जाने की छूट दी है। कोर्ट ने विजय मदनलाल चौधरी केस के संदर्भ में यह भी कहा कि आगे के सबूत कोर्ट की अनुमति से रिकॉर्ड पर लाए जा सकते हैं। यदि ED ने इन निर्देशों का उल्लंघन किया है, तो आरोपी हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।
इस फैसले से भूपेश बघेल के पक्ष में एक बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन अब मामला उच्च न्यायालय में आगे बढ़ेगा।




